Ramadan 2030: एक ही साल में दो बार आएगा रमजान, 33 साल बाद बन रहा है ऐसा संयोग
साल 2030 में एक बेहद अनोखी खगोलीय घटना होने वाली है, जिसका सीधा असर दुनियाभर के मुसलमानों और विशेषकर खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 के ग्रेगोरियन वर्ष (अंग्रेजी साल) में रमजान का पवित्र महीना एक नहीं बल्कि दो बार आएगा। ऐसा संयोग करीब 33 साल बाद बन रहा है, जब चंद्र कैलेंडर और सौर कैलेंडर के फर्क के कारण एक ही साल में दो बार रोजे रखे जाएंगे। इससे पहले ऐसा साल 1997 में हुआ था और अब 2030 में यह फिर से होने जा रहा है।
2030 में इन तारीखों पर शुरू होंगे दो रमजान
खगोलविदों और जानकारों के अनुसार, 2030 में रमजान की शुरुआत साल के एकदम शुरू में और फिर साल के अंत में होगी। यह हिजरी कैलेंडर के साल 1451 और 1452 का हिस्सा होंगे। नीचे दी गई संभावित तारीखों पर नजर डालें:
- पहला रमजान: यह 5 जनवरी 2030 के आसपास शुरू होगा और 30 दिनों तक चलेगा। इसकी ईद (ईद-उल-फितर) 4 फरवरी 2030 के आसपास मनाई जाएगी।
- दूसरा रमजान: साल खत्म होते-होते, यानी 26 दिसंबर 2030 को रमजान का महीना दोबारा शुरू हो जाएगा।
- कुल रोजे: इस साल मुसलमानों को कुल मिलाकर लगभग 36 दिन रोजे रखने होंगे। 30 दिन जनवरी में और करीब 5-6 दिन दिसंबर के अंत में।
क्यों हो रहा है ऐसा और इसका क्या है कारण?
दुबई एस्ट्रोनॉमी ग्रुप और अमीरात एस्ट्रोनॉमी सोसाइटी के जानकारों ने बताया है कि यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि कैलेंडर का गणित है। इस्लामिक हिजरी कैलेंडर चांद पर आधारित होता है, जिसमें साल 354 दिनों का होता है। वहीं, अंग्रेजी कैलेंडर (ग्रेगोरियन) सूरज पर आधारित होता है और इसमें 365 दिन होते हैं।
हर साल रमजान अंग्रेजी कैलेंडर से करीब 10 से 12 दिन पहले खिसक जाता है। इसी खिसकने की वजह से एक 33 साल का चक्र बनता है जब रमजान साल में दो बार आ जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह एक प्राकृतिक चक्र है और इसके बाद यह संयोग 2063 में दोबारा बनेगा। हालांकि, दोनों रमजान की पक्की तारीख चांद दिखने (Moon Sighting) पर ही निर्भर करेगी।
गल्फ में रहने वाले भारतीयों पर क्या होगा असर?
सऊदी अरब, यूएई, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। इन देशों में रमजान के दौरान सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में काम के घंटे (Working Hours) कम कर दिए जाते हैं। आमतौर पर ड्यूटी में 2 घंटे की छूट मिलती है। अगर 2030 में मौजूदा नियम लागू रहे, तो गल्फ में काम करने वाले लोगों को एक ही साल में दो बार कम काम के घंटों का फायदा मिलेगा। यह नियम वहां के प्रवासियों के जीवनशैली पर सीधा असर डालेगा।




