UAE का UN में बड़ा बयान, ईरान के हमलों को ‘जवाबी कार्रवाई’ मानने से किया साफ इनकार
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सत्र के दौरान एक बड़ा कूटनीतिक बयान दिया है। UAE के प्रतिनिधिमंडल ने ईरान द्वारा क्षेत्र में किए जा रहे सैन्य हमलों को ‘जवाबी कार्रवाई’ (retaliatory) कहने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस शब्द का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की एक सोची-समझी कोशिश की जा रही है।
हमले को जवाबी कार्रवाई क्यों नहीं मान रहा UAE?
UAE के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि ने मानवाधिकार परिषद में साफ कहा कि ईरान के हमलों को सिर्फ एक बदला या जवाबी कार्रवाई बताकर पेश करना गलत है। इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल असल में एक झूठी कहानी बनाने के लिए किया जा रहा है। ऐसा करके उन आक्रामक कदमों को सही ठहराने की कोशिश हो रही है, जो दूसरे देशों की संप्रभुता का खुलेआम उल्लंघन करते हैं।
इसके अलावा, UAE ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे हमलों से आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है। क्षेत्रीय सुरक्षा और लोगों पर पड़ने वाले इसके बुरे असर को भी ऐसे शब्दों के पीछे छिपाने की कोशिश की जाती है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का दिया हवाला
अपने संबोधन में UAE ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) के नियमों का सख्ती से पालन करने की बात कही है। देश के प्रतिनिधि ने कहा कि किसी भी देश को ‘बदले’ के नाम पर अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे से बचने की छूट बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए। सैन्य अभियानों को सही ठहराने के लिए ऐसे बहाने बनाना पूरी तरह से गलत है।
यह अहम बयान जिनेवा में चल रहे मानवाधिकार परिषद के मार्च सत्र के दौरान दिया गया। इस बयान के जरिए UAE ने क्षेत्रीय संघर्षों में देशों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गलत कानूनी तर्कों को विश्व मंच पर कड़ी चुनौती दी है।




