सोशल मीडिया पर अक्सर यह बात फैलती है कि यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब में भारतीय ड्राइवरों के लिए वीजा के नियम बहुत आसान कर दिए गए हैं और वहां के लोग भारतीयों को खास पसंद करते हैं। हालांकि, हकीकत यह है कि इन देशों में नौकरी पाने के लिए एक तय प्रक्रिया है और कोई ‘आसान वीजा’ जैसी स्कीम नहीं है। अगर आप भी वहां गाड़ी चलाने की नौकरी के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको सही नियमों और सैलरी के बारे में पता होना चाहिए।
UAE और सऊदी में काम करने के लिए वीजा नियम क्या हैं?
सऊदी अरब और UAE में काम करने के लिए एंप्लॉयमेंट वीजा (Employment Visa) की जरूरत होती है। यह वीजा आपको तभी मिलता है जब वहां की कोई कंपनी या कफिल (Sponsor) आपको नौकरी का ऑफर देता है। आप टूरिस्ट वीजा पर जाकर वहां कानूनी रूप से काम नहीं कर सकते। सऊदी अरब ने जनवरी 2025 से नियमों को थोड़ा सख्त किया है, जिसके तहत अब भारत से जाने वाले वर्कर का क्वालिफिकेशन वेरिफिकेशन पहले ही होता है।
वहां ड्राइवरों को कितनी मिलती है सैलरी?
इन देशों में ड्राइवरों की कमाई भारत के मुकाबले काफी बेहतर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक औसत सैलरी इस प्रकार है:
| देश | करेंसी में सैलरी | भारतीय रुपये (लगभग) |
|---|---|---|
| UAE (दुबई/अबू धाबी) | 2,500 – 3,200 AED | ₹58,000 – ₹73,000 |
| सऊदी अरब | 3,100 – 3,500 SAR | ₹70,000 – ₹78,000 |
क्या वहां कमाई पर टैक्स नहीं लगता?
गल्फ के देशों में काम करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वहां पर्सनल इनकम टैक्स (Personal Income Tax) नहीं लगता है। यानी आपकी सैलरी से सरकार टैक्स के नाम पर पैसा नहीं काटती। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार मुफ्त में छूट बांट रही है। वहां रहने का खर्च और वेट (VAT) जैसे अन्य खर्चे होते हैं, लेकिन आपकी मेहनत की कमाई पूरी आपके हाथ में आती है।
भारतीय लाइसेंस वहां चलता है या नहीं?
अगर आपके पास भारत का ड्राइविंग लाइसेंस है, तो UAE में कुछ शर्तों के साथ इसे एक्सचेंज करने की सुविधा मिलती है। वहीं, सऊदी अरब में आप भारतीय लाइसेंस और इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट (IDP) के साथ शुरुआत में गाड़ी चला सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक काम करने के लिए आपको वहां का लोकल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना ही पड़ता है।




