Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन ने बनाया नया प्लान, अमेरिका को दी सैन्य बेस की अनुमति
ब्रिटेन सरकार के मंत्रियों ने Strait of Hormuz में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया है। 20 मार्च 2026 को हुई एक बैठक के दौरान मंत्रियों ने मिडिल ईस्ट के ताजा हालात पर चर्चा की और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने का फैसला लिया। सरकार ने साफ किया है कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को ईरान के हमलों से बचाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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क्या है ब्रिटेन का नया सुरक्षा प्लान और अमेरिका की भूमिका?
ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है जिससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। इसमें RAF Fairford और Diego Garcia जैसे अहम बेस शामिल हैं जिनका उपयोग डिफेंस ऑपरेशन के लिए होगा।
- अमेरिका इन ठिकानों का इस्तेमाल उन ईरानी मिसाइल साइटों को निष्क्रिय करने के लिए कर सकेगा जो जहाजों पर हमला कर रही हैं।
- इस फैसले को सामूहिक आत्मरक्षा के तौर पर देखा जा रहा है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
- ब्रिटेन खुद इन हमलों में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा लेकिन वह अमेरिका को तकनीकी और सामरिक सहयोग देगा।
कौन से देश इस गठबंधन में शामिल हैं और इसका क्या असर होगा?
ब्रिटेन इस मिशन में अकेला नहीं है और कई बड़े देशों के साथ मिलकर रणनीति बना रहा है। 19 मार्च को एक साझा बयान जारी कर ईरान के द्वारा समुद्री रास्तों को रोकने की कोशिशों की निंदा की गई थी।
| देश का नाम | सहयोग का प्रकार |
|---|---|
| ब्रिटेन (UK) | सैन्य बेस और रक्षा रणनीति |
| अमेरिका (US) | सुरक्षात्मक सैन्य ऑपरेशन |
| फ्रांस और जर्मनी | राजनयिक और सुरक्षा सहयोग |
| इटली और नीदरलैंड | जहाजों की निगरानी और सुरक्षा |
| जापान और कनाडा | आर्थिक और रसद समर्थन |
इन सभी देशों ने मांग की है कि ईरान तुरंत जहाजों को रोकने की कोशिशें बंद करे। इस तनाव का सीधा असर उन भारतीयों पर पड़ सकता है जो खाड़ी देशों में काम करते हैं या वहां से व्यापार करते हैं क्योंकि इससे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर असर पड़ता है। जहाजों की सुरक्षा बढ़ने से खाड़ी देशों से भारत आने वाले सामान और कच्चे तेल की सप्लाई सुरक्षित रहेगी जिससे आम आदमी को राहत मिलेगी।




