US Army Middle East Update: मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने तैनात किए 50,000 से ज्यादा सैनिक, ईरान के साथ तनाव के बीच पेंटागन का बड़ा एक्शन
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या को बढ़ाकर 50,000 के पार कर दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह सामान्य तैनाती से लगभग 10,000 ज्यादा है और पिछले कई सालों में यह अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देशों में स्थित अमेरिकी बेस पर हलचल काफी तेज हो गई है। पेंटागन अब ईरान के खिलाफ अगले कुछ हफ्तों के लिए विशेष जमीनी अभियानों की तैयारी कर रहा है।
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अमेरिकी सेना की तैनाती और सैन्य ताकत की मुख्य जानकारी
पेंटागन ने हाल ही में 82nd Airborne Division के हजारों सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजा है, जो बहुत कम समय में कार्रवाई करने के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, USS Tripoli और USS New Orleans जैसे बड़े युद्धपोत भी मरीन सैनिकों के साथ खाड़ी क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ऑपरेशन के तहत अब तक ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया गया है।
- ईरान के 150 से ज्यादा नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया गया है।
- अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं।
- सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कुवैत में नए सैनिक तैनात किए गए हैं।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के पास बातचीत और सैन्य कार्रवाई के सभी रास्ते खुले हैं।
विशेषज्ञों की राय और आम जनता पर पड़ने वाला असर
मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी फौज और ईरान की स्थिति को समझने के लिए नीचे दी गई जानकारी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या के बावजूद केवल 50,000 सैनिक ईरान जैसे बड़े देश पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि ईरान की आबादी 9.3 करोड़ है।
| विवरण | ताजा जानकारी |
|---|---|
| कुल अमेरिकी सैनिक | 50,000 से अधिक |
| मुख्य सैन्य यूनिट | 82nd Airborne और मरीन यूनिट |
| ऑपरेशन का नाम | Operation Epic Fury |
| क्षेत्रीय प्रभाव | हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की सप्लाई बाधित |
ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह तनाव चिंता का विषय है क्योंकि इससे भविष्य में यात्रा और हवाई उड़ानों पर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्री मार्को रूबियो का कहना है कि अमेरिका जमीनी सेना के बिना भी अपने लक्ष्यों को हासिल करने की क्षमता रखता है, लेकिन हर स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है।




