US-Iran तनाव बढ़ा, पाकिस्तान की कोशिशों के बाद भी बातचीत फेल, डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी का किया ऐलान
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों को युद्ध रोकने और सीजफायर बनाए रखने की सलाह दी, लेकिन इस्लामाबाद में हुई बातचीत कोई ठोस नतीजा नहीं निकाल सकी। अब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नौसेना घेराबंदी शुरू कर दी है, जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई है।
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इस्लामाबाद की बातचीत में क्या हुआ?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर अभी भी कायम है। हालांकि, इस्लामाबाद में हुई मीटिंग में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलने जैसे बड़े मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन पाई। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तनाव कम करने और शांति brokering में अहम भूमिका निभाई थी।
अमेरिका और ईरान के बीच अब क्या स्थिति है?
बातचीत फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के बंदरगाहों की नौसेना घेराबंदी का आदेश दिया। यह घेराबंदी 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे (ET) से लागू हो गई। ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर ईरान के कोई भी तेज़ हमले वाले जहाज़ अमेरिकी घेराबंदी के करीब आए, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। जवाब में ईरान ने भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी सैन्य जहाज़ पर हमला हो सकता है।
दुनिया के अन्य देशों का इस पर क्या कहना है?
चीन और तुर्की ने भी इस मामले में अपनी राय रखी है। चीन ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से फोन पर बात करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में शांति बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। वहीं, तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान का मानना है कि दोनों देश सीजफायर को लेकर गंभीर हैं। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने यह साफ़ कर दिया है कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जहाजों का रास्ता रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है।
| संस्था/देश | मुख्य भूमिका और एक्शन |
|---|---|
| पाकिस्तान | प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सीजफायर के लिए मध्यस्थता की |
| अमेरिका | राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की |
| ईरान | नौसैनिक जहाजों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी |
| चीन और तुर्की | मिडिल ईस्ट में शांति और सीजफायर का समर्थन किया |
| UN एजेंसी | होर्मुज जलडमरूमध्य में रास्ता रोकना गैरकानूनी बताया |




