अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक नई खबर सामने आई है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत पूरी तरह सफल नहीं रही, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समझौते की दिशा में कुछ प्रगति हुई है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों के लिए नेवल ब्लॉकेड का ऐलान कर दिया है।

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बातचीत में क्या हुआ और कहां फंसा मामला?

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान की टीमों के बीच 20 घंटे से ज़्यादा लंबी बातचीत हुई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने बताया कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की लिखित गारंटी देने को तैयार नहीं था, जिससे समझौता नहीं हो पाया। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनी थी, लेकिन अमेरिका की शर्तें बहुत ज़्यादा थीं।

  • अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल के फ्रीज का प्रस्ताव दिया था।
  • ईरान ने अमेरिका पर अपनी बात बार-बार बदलने का आरोप लगाया।
  • ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका पर भरोसे की कमी जताई।

नेवल ब्लॉकेड और आगे की राह क्या है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड लागू करने की घोषणा की। इसके तहत Strait of Hormuz में ईरान के बंदरगाहों पर जाने वाले या वहां से निकलने वाले जहाजों को रोका जाएगा। अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि जो जहाज ईरान के बंदरगाहों पर नहीं जा रहे, उनके आने-जाने के रास्ते में कोई रुकावट नहीं आएगी।

किन देशों की कोशिशें जारी हैं?

समझौते को बचाने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के मध्यस्थ लगातार कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अभी भी बातचीत के रास्ते खुले हैं और कुछ मुद्दों पर काम आगे बढ़ा है। 21 अप्रैल को युद्धविराम खत्म होने से पहले एक स्थाई समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। इस बीच इसराइल ने युद्धविराम का समर्थन किया है, लेकिन लेबनान में हिज़बुल्लाह के खिलाफ उसके ऑपरेशन जारी रहेंगे।