US-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने उतारी भारी फौज, हजारों मरीन और एयरबोर्न सैनिक तैनात
मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य पकड़ काफी मजबूत कर ली है। अमेरिका ने हजारों की संख्या में अतिरिक्त मरीन (Marines) और एयरबोर्न सैनिकों को इस इलाके में तैनात किया है। डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H.W. Bush भी इस क्षेत्र के लिए रवाना कर दिया गया है। फिलहाल मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या 50,000 के पार पहुंच चुकी है।
ℹ: ईरान के राष्ट्रपति का अमेरिका को बड़ा संदेश, बोले बुनियादी ढांचे पर हमला करना कमजोरी की निशानी।
अमेरिकी सेना की नई तैनाती और सैनिकों की संख्या कितनी है?
पेंटागन और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने नई तैनाती के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। इस तैनाती में दुनिया की सबसे आधुनिक और तेजी से हमला करने वाली यूनिट्स शामिल हैं। जापान और कैलिफोर्निया से हजारों मरीन सैनिक समुद्र के रास्ते क्षेत्र में पहुंच रहे हैं।
| यूनिट का नाम | सैनिकों की संख्या | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| 31st Marine Expeditionary Unit | 2,200 | मिडिल ईस्ट जलक्षेत्र में मौजूद |
| 11th Marine Expeditionary Unit | 2,500 | सैन डिएगो से रवाना |
| 82nd Airborne Division | 2,000 | तैनाती शुरू हो चुकी है |
| USS George H.W. Bush (Carrier) | 6,000+ | स्ट्राइक ग्रुप के साथ तैनात |
82nd Airborne Division के सैनिकों को खास तौर पर पैराशूट के जरिए दुश्मन के इलाके में उतरने और हवाई अड्डों पर कब्जा करने की ट्रेनिंग दी गई है। वहीं मरीन यूनिट्स समुद्र से जमीन पर हमला करने और नागरिकों को सुरक्षित निकालने के काम में माहिर मानी जाती हैं।
इस सैन्य हलचल का खाड़ी क्षेत्र पर क्या असर होगा?
ईरान के साथ जारी इस युद्ध का असर अब पड़ोसी देशों कुवैत, बहरीन और UAE पर भी महसूस किया जा रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार को अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन दो से तीन हफ्तों के भीतर खत्म हो सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान संघर्ष विराम चाहता है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि इस रास्ते को खुला रखने की जिम्मेदारी अब उन देशों की होगी जो व्यापार के लिए इस पर निर्भर हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने समुद्री सुरक्षा को देखते हुए एक टास्क फोर्स का गठन किया है ताकि तेल की सप्लाई और व्यापार में कोई बड़ी बाधा न आए।
ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad-Bagher Ghalibaf ने इस स्थिति को एक बड़े विश्व युद्ध की तरह बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से बातचीत की बात कर रहा है लेकिन गुप्त रूप से जमीनी हमले की योजना बना रहा है। अमेरिकी सेना पहले ही खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों पर निगरानी और बमबारी कर चुकी है।




