धर्मनगरी हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हरकी पैड़ी पर इन दिनों पहचान और सत्यापन का विषय चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। हालिया घटनाक्रम में गंगा घाट क्षेत्र और इसके आसपास स्थित दुकानों व प्रतिष्ठानों पर काम करने वाले लोगों की पहचान जांची जा रही है। विशेष रूप से कामगारों से उनके पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे जाने और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर की जा रही पूछताछ ने इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। इस पूरी कवायद के पीछे मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि तीर्थ क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्ति कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है।
गंगा घाट क्षेत्र में खानपान और दैनिक उपयोग की दुकानों पर काम करने वालों की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया हुई तेज
हरकी पैड़ी और आसपास के गंगा घाट क्षेत्र में दैनिक उपयोग का सामान बेचने वाली दुकानों और खानपान के स्टॉल्स पर काम करने वाले कर्मचारियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इन प्रतिष्ठानों पर कार्यरत लोगों को अपना वैध पहचान पत्र पास रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया का मूल उद्देश्य यह जानना है कि धार्मिक स्थल पर अपनी सेवाएं दे रहे लोग किस क्षेत्र और पृष्ठभूमि से आते हैं। सत्यापन की इस प्रक्रिया को सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की गुंजाइश न रहे और प्रशासन के पास यहां काम करने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड मौजूद हो।
हरकी पैड़ी पर लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के मद्देनजर सुरक्षा और धार्मिक मर्यादा को दी जा रही है सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह अभियान किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि व्यवस्था को सुचारू बनाने की एक कोशिश है। हरकी पैड़ी क्षेत्र में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। भीड़ बढ़ने के साथ ही घाटों पर अव्यवस्था की स्थिति भी कई बार उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में प्रशासन का तर्क है कि तीर्थ स्थल की सुरक्षा, सुव्यवस्था और उसकी धार्मिक मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाना समय की मांग है। पहचान पत्रों की जांच इसी सुरक्षा चक्र का एक अहम हिस्सा है।
व्यवस्था में सुधार और तीर्थयात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को बनाया गया आधार
घाट क्षेत्र में बढ़ती भीड़ के बीच कुछ स्थानों से अव्यवस्था की शिकायतें भी सामने आ रही थीं। इसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों का सत्यापन अनिवार्य हो। प्रशासन का मानना है कि यदि सभी के पास वैध पहचान पत्र होंगे, तो जरूरत पड़ने पर तुरंत जांच की जा सकती है। इसका सीधा लाभ श्रद्धालुओं को मिलेगा, क्योंकि इससे घाट क्षेत्र में अनावश्यक भीड़ या बाहरी तत्वों की मौजूदगी पर अंकुश लगेगा और तीर्थयात्री बिना किसी परेशानी के अपनी पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
किसी विशेष संप्रदाय को निशाना बनाने की बातों का खंडन, तीर्थ स्थल की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना ही मुख्य उद्देश्य
इस पूरी कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह स्पष्ट किया गया है कि यह जांच अभियान किसी विशिष्ट समुदाय या धर्म को लक्ष्य बनाकर नहीं चलाया जा रहा है। यह एक सामान्य और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका एकमात्र ध्येय हरकी पैड़ी जैसे पवित्र स्थल की गरिमा को बनाए रखना है। सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए यह डेटाबेस तैयार करना आवश्यक माना गया है, ताकि धार्मिक स्थल की पवित्रता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।
स्थानीय व्यापारियों से सहयोग की अपेक्षा और जांच के नाम पर किसी को परेशान किए जाने पर सीधे शिकायत का खुला रास्ता
सत्यापन की इस मुहिम को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने स्थानीय व्यापारियों और दुकान मालिकों से पूर्ण सहयोग की अपील की है। उनसे आग्रह किया गया है कि वे अपने कर्मचारियों के दस्तावेज पूरे रखें। इसके साथ ही, प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि इस प्रक्रिया में किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति को पहचान जांच के नाम पर बेवजह परेशान किया जाता है, तो वह सीधे प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी शिकायत कर सकता है। प्रशासन का प्रयास है कि आपसी सहयोग से तीर्थ नगरी की व्यवस्था को आदर्श बनाया जाए।





