नए साल का आगाज होते ही बैंकिंग सेक्टर से आम आदमी के लिए राहत भरी खबर आई है। देश के दो बड़े बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में कटौती का फैसला किया है, जिससे लोन लेना अब सस्ता हो जाएगा। यह बदलाव उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो होम लोन या कार लोन लेने की योजना बना रहे हैं, साथ ही जमा खाताधारकों और मौजूदा कर्जदारों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।
एचडीएफसी बैंक ने अलग-अलग अवधि के कर्ज पर घटाई दरें, होम और कार लोन की ईएमआई का बोझ होगा कम
निजी क्षेत्र के दिग्गज एचडीएफसी बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में कमी की घोषणा की है। बैंक की ओर से पांच अलग-अलग अवधियों (tenures) के लिए आधार अंकों को घटाया गया है। बैंक द्वारा लागू की गई ये संशोधित दरें 7 जनवरी से प्रभावी हो चुकी हैं। इस संशोधन के बाद एचडीएफसी बैंक की एमसीएलआर दरें अब 8.25 प्रतिशत से घटकर 8.55 प्रतिशत के दायरे में आ गई हैं। बैंक के इस कदम का सीधा असर रिटेल लोन पर पड़ेगा। जिन ग्राहकों ने होम लोन, कार लोन या अन्य लोन ले रखा है और उनकी ब्याज दर एमसीएलआर से जुड़ी है, उन्हें अपनी मासिक किस्त (EMI) में मामूली राहत मिल सकती है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने भी ग्राहकों को दिया तोहफा, ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की भारी गिरावट
एचडीएफसी बैंक के अलावा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने भी अपनी ब्याज दरों में बड़ा बदलाव किया है। बैंक ने अपनी आंतरिक बेंचमार्क दरों में संशोधन करते हुए नई दरों का ऐलान किया है, जो 9 जनवरी 2025 से लागू हो गई हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने मुख्य दर में सीधे 50 आधार अंकों (basis points) की कटौती की है। इस फैसले के बाद बैंक की ब्याज दर 7 प्रतिशत से घटकर 6.5 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। इतनी भारी कटौती को ग्राहकों के लिए एक बड़े राहत कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे कर्ज सस्ता होने का रास्ता साफ हुआ है।
नए और पुराने दोनों ग्राहकों को मिलेगा सीधा फायदा, आने वाले दिनों में अन्य बैंक भी कर सकते हैं बदलाव
ब्याज दरों में हुई इस कटौती का लाभ दो तरह से मिलेगा। पहला, जो ग्राहक बैंक से नया लोन लेंगे, उन्हें अब कम ब्याज दर ऑफर की जाएगी। दूसरा, मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई का बोझ घट सकता है, हालांकि उन्हें इसका लाभ उनकी लोन ‘रीसेट डेट’ आने पर ही मिलेगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई दर और वैश्विक आर्थिक हालात इसी तरह नियंत्रण में रहे, तो आने वाले महीनों में अन्य सरकारी और निजी बैंक भी प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अपनी ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं।





