सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan भारत के छोटे दौरे पर आए थे। इस दौरान भारत और UAE के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर सहमति बनी, जिसे जियोपॉलिटिक्स में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दोनों देशों ने 2032 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा है। यह डील ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में ‘शीत युद्ध’ जैसी स्थिति दिख रही है।
भारत-UAE के लिए यह डील क्यों खास है?
दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में रिश्ते मजबूत करने का फैसला ऐसे समय में लिया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव है। पिछले साल इजरायल ने कतर पर बम गिराया था, जिसके बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ रक्षा संधि की। ऐसे हालात में भारत के लिए खाड़ी के एक ताकतवर देश के साथ रक्षा करार करना बहुत जरूरी हो जाता है। वहीं, सऊदी अरब से बिगड़ते रिश्तों के कारण UAE को भी एक भरोसेमंद साथी की जरूरत महसूस हो रही है।
खाड़ी में ‘शीत युद्ध’ की स्थिति क्या है?
UAE राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब उनके देश का सऊदी अरब के साथ तनाव चल रहा है। 2014 में ये दोनों देश हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक ही सैन्य गठबंधन में थे। अब सूडान में प्रभुत्व को लेकर भी दोनों देशों में सत्ता संघर्ष चल रहा है। यह तनाव इतना बढ़ गया है कि Sheikh Mohammed bin Zayed और Saudi क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman के बीच सीधे बातचीत भी नहीं होती। इसे UAE और सऊदी अरब के बीच नया ‘शीत युद्ध’ कहा जा रहा है।
रणनीतिक रक्षा साझेदारी में क्या-क्या शामिल होगा?
भारत और UAE के बीच जिस रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर बात शुरू हुई है, उसमें रक्षा उत्पादन, नई तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण, विशेष अभियान, साइबरस्पेस और आतंकवाद से लड़ने जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल हो सकता है। यह मौजूदा सैन्य अभ्यासों को और मजबूत करेगा। विदेश सचिव Vikram Misri ने साफ किया है कि इस समझौते को क्षेत्र में किसी ‘काल्पनिक भविष्य के परिदृश्य’ में भारत की सीधी भागीदारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत के बाकी खाड़ी देशों से रिश्ते कैसे हैं?
भारत और UAE के रक्षा क्षेत्र में करीब आने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भारत के बाकी खाड़ी देशों से रिश्ते खराब हुए हैं। भारत को याद है कि इस पूरे क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय लोग रहते हैं। लेकिन, मौजूदा खाड़ी परिस्थितियों में दोनों देशों ने रक्षा और व्यापार में रिश्ते मजबूत करके अपनी स्थिति काफी मजबूत की है। भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान से निपटने की तैयारी में है, तो UAE अपने क्षेत्रीय दुश्मनों से मिल रही चुनौती का सामना करना चाहता है।
रक्षा के अलावा और कौन से मुख्य समझौते हुए?
रक्षा साझेदारी के अलावा, दोनों देशों ने अंतरिक्ष और ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसमें अंतरिक्ष के बुनियादी ढांचे और नागरिक परमाणु ऊर्जा में साझेदारी शामिल है। UAE साल 2028 से भारत को हर साल 0.5 मिलियन MTPA LNG की सप्लाई करेगा, जिससे वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर बन जाएगा। Gujarat के Dholera विशेष निवेश क्षेत्र में UAE निवेश करेगा, जिसमें हवाई अड्डा और ग्रीनफील्ड बंदरगाह जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। AI, सुपरकंप्यूटिंग और खाद्य सुरक्षा पर भी करार हुए हैं।
डिस्क्लेमर: निवेश और व्यापार से जुड़े फैसले जोखिम भरे हो सकते हैं। कोई भी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।
Last Updated: 22 January 2026




