Donald Trump की धमकी से ईरान में मचा हड़कंप, बिजली घरों को बचाने के लिए लोगों ने बनाई इंसानी दीवार, खाड़ी में तनाव बढ़ा
ईरान में आज लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और उन्होंने सरकारी ठिकानों के बाहर मोर्चा संभाल लिया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई ‘स्टोन एज’ यानी पत्थर युग में भेजने वाली धमकी के विरोध में लोगों ने बिजली घरों और पुलों के सामने इंसानी दीवार बना ली है। 7 अप्रैल 2026 को पूरे देश में तनाव का माहौल बना हुआ है क्योंकि ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि वह ईरान के नागरिक ठिकानों को निशाना बनाएंगे।
डोनाल्ड ट्रंप की धमकी और ईरान का जवाब क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बड़ा अल्टीमेटम दिया है जिसमें कहा गया है कि अगर ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को आज रात 8 बजे तक नहीं खोला, तो उसके बुनियादी ढांचों पर भारी बमबारी की जाएगी। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दावा किया कि देश के 1.4 करोड़ लोग अपनी जान देने और देश की रक्षा करने के लिए तैयार हैं। ईरान के अधिकारियों ने युवाओं, छात्रों और कलाकारों से अपील की है कि वे पावर प्लांट के चारों तरफ सुरक्षा घेरा बना लें।
हमले वाले मुख्य स्थान और खाड़ी क्षेत्र पर इसका असर
ईरान के कई इलाकों में हवाई हमले और धमाकों की खबरें मिली हैं जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में खलबली मच गई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने खुली धमकी दी है कि अगर हमला हुआ तो वे अमेरिका और उसके साथियों को इस क्षेत्र के तेल और गैस से सालों तक वंचित कर देंगे। इससे खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
| प्रभावित स्थान | ताज़ा अपडेट |
|---|---|
| शिराज (Shiraz) | पेट्रोकेमिकल साइट पर हमले की खबर मिली है |
| दक्षिण पार्स (South Pars) | गैस प्लांट को निशाना बनाया गया है |
| खुर्रमाबाद एयरपोर्ट | हवाई अड्डे पर मिसाइल हमले की जानकारी है |
| रेलवे नेटवर्क | इजरायल ने रेलवे से दूर रहने की चेतावनी दी है |
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन हमलों और धमकियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है कि नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और यह युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। फ्रांस ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि ऊर्जा ढांचे पर हमले करना गलत है। फिलहाल तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत के रास्ते बंद नजर आ रहे हैं।




