Kuwait FATF Grey List: कुवैत गया ग्रे लिस्ट में, अब बैंक ट्रांजेक्शन और विदेशों में पैसा भेजने पर पड़ेगा असर
कुवैत को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया है। मैक्सिको सिटी में 11 से 13 फरवरी 2026 तक चली एक बड़ी बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इस लिस्ट में आने का मतलब है कि अब कुवैत के बैंकिंग सिस्टम और पैसों के लेन-देन पर दुनिया भर की कड़ी नज़र रहेगी। कुवैत के साथ पापुआ न्यू गिनी को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है।
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कुवैत को ग्रे लिस्ट में क्यों डाला गया और इसका क्या मतलब है?
FATF एक ऐसी संस्था है जो दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसी अवैध गतिविधियों पर नज़र रखती है। कुवैत को ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने का मतलब यह नहीं है कि उस पर कोई पाबंदी लगी है, बल्कि इसका मतलब है कि देश को अपने बैंकिंग नियमों में और सुधार करने की ज़रूरत है। कुवैत सरकार ने भरोसा दिलाया है कि उन्होंने पहले ही 95 प्रतिशत ज़रूरी सुधार कर लिए हैं और बाकी बचे हुए कामों को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
आम जनता और प्रवासियों पर क्या असर पड़ेगा?
कुवैत में रहने वाले लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर काफी अहम है। हालांकि इससे रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कोई सीधा असर नहीं होगा, लेकिन बैंकिंग से जुड़े कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
- Remittance: भारत या किसी अन्य देश पैसा भेजने पर अब बैंक पहले से ज़्यादा जानकारी मांग सकते हैं।
- Transactions: विदेशों में पैसा भेजने या मंगाने में पहले के मुकाबले ज़्यादा समय लग सकता है।
- Banking Fees: ज़्यादा कागज़ी कार्रवाई और जांच की वजह से बैंक अपनी फीस में मामूली बढ़ोतरी कर सकते हैं।
- Verification: बैंक अब पैसों के स्रोत (Source of Income) की ज़्यादा बारीकी से जांच करेंगे।
आने वाले समय के लिए मुख्य जानकारी
कुवैत सरकार अब एक खास एक्शन प्लान पर काम करेगी ताकि इस लिस्ट से जल्द से जल्द बाहर निकला जा सके। इसमें असली मालिकों (Beneficial Ownership) की जानकारी साफ़ करना और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की रिपोर्टिंग को मज़बूत करना शामिल है।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| लागू होने की तारीख | 13 फरवरी 2026 |
| लिस्ट का प्रकार | ग्रे लिस्ट (बढ़ी हुई निगरानी) |
| मुख्य संस्था | FATF और MENAFATF |
| प्रतिनिधि | डॉ. सुबीह अल-मुखैज़ीम |




