OECD की नई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, ब्रिटेन में महंगाई होगी दोगुनी, मिडिल ईस्ट युद्ध का दिखेगा बड़ा असर
Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD) ने 26 मार्च 2026 को अपनी ताज़ा रिपोर्ट जारी की है। इसमें चेतावनी दी गई है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का सबसे बुरा असर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में महंगाई दर पहले के अनुमान 2.5% से बढ़कर अब 4% तक पहुंच सकती है। इस युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट और खाने-पीने की चीज़ों की किल्लत होने का खतरा पैदा हो गया है।
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
OECD ने ब्रिटेन की आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ का अनुमान 1.2% से घटाकर मात्र 0.7% कर दिया है। यह बड़ी गिरावट बताती है कि वहां की आर्थिक रफ्तार काफी सुस्त रहने वाली है। ब्रिटेन की चांसलर Rachel Reeves ने स्वीकार किया है कि मिडिल ईस्ट के युद्ध का असर उनके देश पर साफ़ दिखेगा। लंदन के शेयर बाज़ार में भी इस खबर के बाद गिरावट देखी गई है, क्योंकि निवेशकों को आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। सरकार अब क्षेत्रीय विकास और AI जैसी तकनीक के सहारे इकोनॉमी को संभालने की योजना बना रही है।
रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारियां
OECD की रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रिटेन G7 देशों में अमेरिका के बाद दूसरी सबसे ज़्यादा महंगाई वाला देश बन सकता है। युद्ध की वजह से तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट आने की पूरी संभावना है।
| पैमाना | नया अनुमान (2026) | पुराना अनुमान (दिसंबर) |
|---|---|---|
| महंगाई दर (Inflation) | 4% | 2.5% |
| GDP ग्रोथ दर | 0.7% | 1.2% |
| प्रमुख चिंता | ऊर्जा और खाद की कमी | सप्लाई चेन में बाधा |
संगठन ने दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों को महंगाई पर कड़ी नज़र रखने की सलाह दी है। साथ ही सरकारों से कहा है कि वे ऊर्जा के सही इस्तेमाल को बढ़ावा दें और गरीब परिवारों को आर्थिक मदद पहुंचाएं ताकि वे बढ़ती कीमतों का सामना कर सकें।
मिडिल ईस्ट में युद्ध और शांति की कोशिशें
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने की मियाद 6 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है। पाकिस्तान के ज़रिए ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर अभी बातचीत चल रही है। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ है। इजरायली सेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रखे हैं और लेबनान में भी अपनी सैन्य कार्रवाई का विस्तार किया है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी एक रिपोर्ट जारी कर सभी पक्षों पर युद्ध के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।




