ओमान के Salalah Port पर ईरान का ड्रोन हमला, कुवैत ने किया कड़ा विरोध और यात्रा पर दिखा असर
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ओमान के सलालाह पोर्ट पर हुए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है। 11 मार्च 2026 को हुए इस हमले को कुवैत ने एक खतरनाक कदम और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि कई फ्लाइट्स और पोर्ट ऑपरेशंस पर इसका सीधा असर पड़ा है।
ℹ️: Oman सरकार का बयान: देश भर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य, सभी पंपों पर मिल रहा है फ्यूल।
हमले से जुड़ी मुख्य बातें और क्या हुआ नुकसान
ओमान के दक्षिणी हिस्से में मौजूद सलालाह पोर्ट के फ्यूल स्टोरेज टैंक को ड्रोन से निशाना बनाया गया। ओमान के एयर डिफेंस ने कई ड्रोन गिराए, लेकिन एक ड्रोन पोर्ट की सुविधा पर गिर गया जिससे वहां आग लग गई।
राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी की जान जाने की खबर नहीं है। हमले के बाद दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनी Maersk ने सलालाह पोर्ट पर अपना काम अगले आदेश तक के लिए रोक दिया है।
कुवैत और ओमान के आधिकारिक सूत्रों ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ बताया है। कुवैत नेशनल गार्ड ने भी इसी दिन अपने हवाई क्षेत्र में 8 संदिग्ध ड्रोन मार गिराने की पुष्टि की है और अहम जगहों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
खाड़ी में काम करने वाले भारतीयों और प्रवासियों पर असर
इस क्षेत्र में पिछले 12 दिनों से चल रहे तनाव का सीधा असर गल्फ देशों में रहने वाले आम लोगों और भारत जैसे देशों से आने वाले प्रवासियों पर पड़ रहा है। कुवैत के आंतरिक मंत्रालय ने सभी लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
हवाई क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए रुकावटें आ रही हैं। जो लोग कुवैत से सफर कर रहे हैं, उन्हें अब सऊदी अरब के रास्ते सड़क मार्ग का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए Deloitte, PwC और Citi जैसी बड़ी कंपनियों ने कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में अपने दफ्तर बंद कर दिए हैं या कर्मचारियों को सुरक्षित जगहों पर भेज दिया है। तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए IEA ने भी 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फैसला लिया है।




