Donald Trump ने ईरान को दी 48 घंटे की मोहलत, बोले सोमवार तक होर्मुज रास्ता नहीं खुला तो बरपेगा कहर.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया है। ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में साफ किया है कि अगर सोमवार 6 अप्रैल 2026 तक ईरान ने उनकी बात नहीं मानी और रास्ता नहीं खोला, तो उन पर भारी सैन्य हमला किया जाएगा। खाड़ी क्षेत्र में इस तनाव की वजह से वहां रहने वाले प्रवासियों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है क्योंकि यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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ट्रंप की चेतावनी और मौजूदा स्थिति क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने 4 अप्रैल 2026 को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के पास ‘डील करने या रास्ता खोलने’ के लिए अब बहुत कम समय बचा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में ‘All Hell Will Reign Down’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिसका मतलब है कि ईरान को बहुत बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। सोमवार की डेडलाइन से पहले अमेरिका और इसराइल के बीच सैन्य तालमेल की खबरें भी आ रही हैं। खाड़ी में रहने वाले भारतीयों और अन्य कामगारों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस रास्ते से होने वाली सप्लाई रुकने से महंगाई और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
ईरान का इस पूरे मामले पर क्या कहना है?
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 4 अप्रैल को संकेत दिया है कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है।
- ईरान ने घोषणा की है कि इराक के जहाजों को होर्मुज के रास्ते आने-जाने में छूट दी जाएगी।
- अभी भी ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को सीमित कर दिया है।
- अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस रास्ते को सौदेबाजी के लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
ताजा घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय कोशिशें
| खास जानकारी | ताजा अपडेट |
|---|---|
| अल्टीमेटम की तारीख | सोमवार, 6 अप्रैल 2026 |
| मध्यस्थता करने वाले देश | पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र |
| सैन्य घटना | ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हवाई हमला हुआ |
| कानूनी स्थिति | अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज एक खुला समुद्री रास्ता है |
इस बीच पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश इस तनाव को कम करने और युद्ध रोकने के लिए मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं रूस ने ईरान के परमाणु प्लांट पर हुए हमले की निंदा की है और वहां से अपने लोगों को निकाल रहा है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों की नजर अब सोमवार की डेडलाइन पर टिकी है।




