संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बार फिर साफ किया है कि वह ईरान पर किसी भी सैन्य हमले के लिए अपनी ज़मीन, हवाई क्षेत्र या पानी का इस्तेमाल नहीं होने देगा. यूएई के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने 26 जनवरी, 2026 को इस नीति को दोहराया है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है.
यूएई ने क्या बयान दिया है?
यूएई ने कहा है कि वह अपनी ज़मीन, हवाई क्षेत्र या समुद्री जल का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं करने देगा. इसके साथ ही, उसने किसी भी तरह की लॉजिस्टिक सहायता (logistical support) देने से भी इनकार किया है.
यह फैसला कब दोहराया गया?
यह महत्वपूर्ण घोषणा सोमवार, 26 जनवरी, 2026 को संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय (MoFA) द्वारा की गई थी. यह बयान यूएई की 2019 से चली आ रही नीति के अनुरूप है.
इस फैसले के पीछे क्या कारण है?
यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है. मीडिया रिपोर्टों में अमेरिका के युद्धपोतों के खाड़ी क्षेत्र में पहुंचने और ईरान में विरोध प्रदर्शनों की बात कही गई थी. यूएई क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना चाहता है.
कौन से देश इस मामले में शामिल हैं?
इस मामले में मुख्य रूप से तीन देश शामिल हैं:
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): जिसने यह नीति दोहराई है.
- ईरान: जिसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना को लेकर यह बयान दिया गया है.
- संयुक्त राज्य अमेरिका (US): यूएई में उसके हजारों सैन्यकर्मी (personnel) अल धफरा एयर बेस (Al Dhafra Air Base) पर तैनात हैं.
यूएई की विदेश नीति क्या कहती है?
यूएई के विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि मौजूदा संकटों को सुलझाने के लिए बातचीत (dialogue), तनाव कम करना (de-escalation), अंतर्राष्ट्रीय कानून (international law) का पालन करना और देशों की संप्रभुता (state sovereignty) का सम्मान करना सबसे अच्छे तरीके हैं.




