🇬🇧🇦🇪 एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। अक्सर हम सुनते हैं कि मिडिल ईस्ट के छात्र पढ़ाई के लिए लंदन या यूके जाना पसंद करते हैं, लेकिन अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस ट्रेंड पर एक बड़ा ‘ब्रेक’ लगा दिया है।
UAE ने साफ़ कह दिया है कि वह अपने नागरिकों को ब्रिटेन (UK) के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए सरकारी स्कॉलरशिप और फंडिंग नहीं देगा।
वजह? डर! जी हाँ, UAE को डर है कि उनके बच्चे ब्रिटिश कैंपसों में जाकर ‘कट्टरपंथी’ हो सकते हैं। आइये, इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।
🚫 आखिर UAE ने ऐसा क्यों किया?
UAE शिक्षा मंत्रालय ने अपनी ‘मंजूर लिस्ट’ से ब्रिटिश संस्थानों को हटा दिया है। इसके पीछे की मुख्य वजह है मुस्लिम ब्रदरहुड (Muslim Brotherhood – MB)।
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UAE का नज़रिया: UAE मुस्लिम ब्रदरहुड को एक आतंकवादी संगठन मानता है।
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UK का नज़रिया: ब्रिटेन ने इसे बैन करने से इनकार कर दिया है।
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डर: UAE को लगता है कि यूके के कैंपसों में ऐसे छात्र संगठन सक्रिय हैं जो एमबी (MB) का समर्थन करते हैं और छात्रों को कट्टरपंथी (Radicalize) बना रहे हैं। एक अधिकारी ने तो यहाँ तक कह दिया, “हम अपने बच्चों को कैंपस में कट्टर बनते नहीं देखना चाहते।”

🎓 अब छात्रों का क्या होगा?
यह फैसला बहुत सख्त है और इसके मायने गहरे हैं:
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नए छात्र: जो छात्र अब यूके जाने का प्लान बना रहे थे, उन्हें सरकारी पैसा (Funding) नहीं मिलेगा।
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पुराने छात्र: राहत की बात यह है कि जो छात्र पहले से वहां पढ़ रहे हैं, उनकी फंडिंग जारी रहेगी।
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डिग्री की वैल्यू: सबसे बड़ी बात यह है कि UAE अब यूके की डिग्रियों को मान्यता नहीं देगा, जिससे वहां से पढ़ाई करके लौटने वालों के लिए नौकरी के अवसर कम हो सकते हैं।
🌏 यूके ‘बाहर’, इज़राइल ‘अंदर’?
यह बात थोड़ी हैरान करने वाली है। UAE की नई ‘मंजूर लिस्ट’ में यूके तो नहीं है, लेकिन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और इज़राइल जैसे देश शामिल हैं।
इसका मतलब साफ़ है—UAE को लगता है कि अमेरिका और इज़राइल के कैंपस उसके छात्रों के लिए ब्रिटेन से ज़्यादा सुरक्षित हैं। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं, “एक अरब देश अब यूरोपीय देश को खतरनाक मान रहा है!”
📉 क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़े बताते हैं कि छात्रों का मोहभंग पहले ही शुरू हो चुका था:
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वीज़ा में गिरावट: सितंबर 2025 तक यूएई छात्रों को मिलने वाले यूके वीज़ा की संख्या गिरकर सिर्फ़ 213 रह गई (पिछले साल से 27% कम)।
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कट्टरपंथ के मामले: यूके में 2023-24 के दौरान 70 छात्रों को ‘इस्लामी कट्टरपंथ’ के शक में सुधरने के लिए (De-radicalization program) भेजा गया, जो पिछले साल से दोगुना है।
🇬🇧 ब्रिटेन का क्या कहना है?
ब्रिटेन इस फैसले से खुश नहीं है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के कार्यालय ने कहा है कि उनका शिक्षा तंत्र दुनिया में बेहतरीन है और वे चरमपंथ पर सख्ती बरतते हैं। लेकिन UAE ने साफ़ कर दिया है कि लिस्ट से यूके का नाम हटाना कोई “गलती” नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला है।
🛑 निष्कर्ष
यह कदम यूएई और ब्रिटेन के रिश्तों में खटास ला सकता है। एक तरफ यूके अपनी यूनिवर्सिटीज पर गर्व करता है, तो दूसरी तरफ यूएई को लगता है कि वहां का माहौल उनके बच्चों के लिए “जहरीला” हो सकता है। अब यूएई के छात्र ब्रिटेन की जगह दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं।





