अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात, बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में अमेरिकी फाइटर जेट
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। 1 अप्रैल 2026 को मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी फाइटर जेट ईरान के भीतर बड़े सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि ईरान में चल रहे अमेरिकी ऑपरेशन बहुत जल्द, शायद दो से तीन सप्ताह के भीतर समाप्त हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर भविष्य में भी चुनिंदा ठिकानों पर हमले किए जा सकते हैं। इस स्थिति का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों पर भी पड़ सकता है।
📰: ईरान ने इज़राइल पर दागीं मिसाइलें, तेल अवीव में भारी नुकसान, कुवैत और कतर पर भी असर।
अमेरिका की सैन्य तैयारी और ट्रंप का बड़ा बयान
- अमेरिकी विमानवाहक पोत USS George H.W. Bush और तीन बड़े युद्धपोत 6,000 से अधिक नाविकों के साथ क्षेत्र में तैनात किए गए हैं।
- 82nd Airborne Division के हजारों अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट में पहुंचना शुरू हो गए हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्था संभाली जा सके।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि मुख्य अभियान समाप्त होने के बाद भी अमेरिका “स्पॉट हिट” करने की क्षमता बनाए रखेगा।
- 28 मार्च को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हुए हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया है।
- अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान वर्तमान में युद्ध अभियानों के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हैं।
ईरान का कड़ा जवाब और अन्य देशों को चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने राष्ट्रपति ट्रंप के उन दावों को गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि ईरान युद्धविराम की कोशिश कर रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei ने दोहराया है कि वे क्षेत्र में इजरायल विरोधी ताकतों को समर्थन देना जारी रखेंगे। तनाव इतना बढ़ गया है कि ईरान ने बुल्गारिया जैसे देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अपने हवाई अड्डों का इस्तेमाल अमेरिकी सेना को न करने दें।
दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी कंपनियों जैसे Meta, Tesla और Boeing को निशाना बनाने की धमकी दी है। यमन के हूतियों ने भी इसी दौरान इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए सुरक्षा और यात्रा से जुड़ी सावधानियां बरतना जरूरी हो गया है, क्योंकि युद्ध के हालात पूरे क्षेत्र की शांति को प्रभावित कर सकते हैं।




