दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 30 जनवरी 2026 को आई ताज़ा जानकारी के मुताबिक कई बड़े देशों ने अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर दी है। रूस, चीन और भारत जैसे देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की जगह सोने को जमा करना शुरू कर दिया है। इस कदम से अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल आया है।
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क्यों डॉलर को छोड़ रहे हैं ये देश?
आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि दुनिया के बड़े बैंक अब सुरक्षा के लिए सोने पर भरोसा कर रहे हैं। चीन ने अमेरिकी ट्रेजरी में अपना निवेश घटाकर 682 बिलियन डॉलर कर दिया है। भारत ने भी इसमें कटौती करते हुए अपना निवेश 186.5 बिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है। रूस के खजाने में अब सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 43.3% हो गई है जो 1995 के बाद सबसे ज्यादा है। ब्राज़ील ने भी अपनी डॉलर होल्डिंग्स में 27% की कमी की है।
स्थानीय करेंसी में व्यापार और नया पेमेंट सिस्टम
अब देश आपसी व्यापार के लिए डॉलर का इस्तेमाल कम कर रहे हैं और अपनी करेंसी को बढ़ावा दे रहे हैं।
- Russia-China: इन दोनों देशों के बीच 90% व्यापार अब रूबल और युआन में हो रहा है।
- India-UAE: भारत और UAE के बीच रुपये और दिरहम में लेन-देन का सिस्टम चालू है। भारतीय UPI अब खाड़ी देशों में भी स्वीकार किया जा रहा है।
- BRICS Pay: जनवरी 2026 में ‘BRICS Pay’ सिस्टम शुरू हो गया है। यह सिस्टम 40% सोने पर आधारित है और इससे बिना डॉलर के व्यापार करना आसान हो गया है।
सोने-चांदी के भाव में ऐतिहासिक तेज़ी
केंद्रीय बैंकों द्वारा डॉलर छोड़कर सोने की खरीदारी करने से इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। 30 जनवरी को सोने का भाव 5,266 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। चांदी ने भी 100 डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा पार कर लिया है। सऊदी अरब भी अब तेल के व्यापार में बदलाव कर रहा है और एशिया के लिए तेल की कीमतों में कटौती पर विचार कर रहा है।




