खाड़ी देशों का कच्चे तेल के बाज़ार में दबदबा कायम, 2024 में ग्लोबल एक्सपोर्ट में 26 प्रतिशत की रही हिस्सेदारी
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों ने 2024 के लिए अपने आर्थिक और ऊर्जा उत्पादन के आंकड़े जारी किए हैं. GCC-Stat और कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी देशों ने दुनिया भर के कच्चे तेल के उत्पादन में 21.8 प्रतिशत का योगदान दिया है. इसके अलावा ग्लोबल कच्चे तेल के निर्यात में भी इन देशों की हिस्सेदारी 26.6 प्रतिशत रही है. इन आधिकारिक रिपोर्टों से यह साफ हो गया है कि ऊर्जा बाज़ार और आर्थिक मोर्चे पर खाड़ी देश लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
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2024 में GCC देशों के मुख्य आर्थिक और ऊर्जा आंकड़े
हाल ही में जारी आधिकारिक रिपोर्टों में खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की गई हैं. इन देशों के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार मौजूद है. नीचे दिए गए टेबल में 2024 के प्रमुख आधिकारिक आंकड़े शामिल किए गए हैं:
| विवरण | आंकड़े (2024) |
|---|---|
| ग्लोबल कच्चे तेल का उत्पादन | 21.8 प्रतिशत |
| ग्लोबल कच्चे तेल का निर्यात | 26.6 प्रतिशत |
| कच्चे तेल का कुल रिज़र्व | 511.9 बिलियन बैरल (दुनिया में पहला स्थान) |
| प्राकृतिक गैस रिज़र्व | 44.3 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर |
| कुल GDP (सकल घरेलू उत्पाद) | 2.3 ट्रिलियन डॉलर |
| गैर-तेल क्षेत्र (Non-oil sector) की हिस्सेदारी | कुल GDP का 76 प्रतिशत |
| व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) | 109.7 बिलियन डॉलर |
| GCC सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार | 146 बिलियन डॉलर |
| बैंकों की कुल संपत्ति | 3.5 ट्रिलियन डॉलर |
गैर-तेल क्षेत्र और बैंकिंग में लगातार हो रहा सुधार
खाड़ी देश अब पूरी तरह से कच्चे तेल की कमाई पर निर्भर नहीं रहना चाहते और नई नीतियों पर काम कर रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार GCC देशों की कुल GDP का 76 प्रतिशत हिस्सा अब गैर-तेल क्षेत्र से आ रहा है. यह सदस्य देशों द्वारा चलाए जा रहे आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का सीधा नतीजा है. सदस्य देशों के बीच होने वाला आपसी व्यापार भी पिछले साल के मुकाबले 10 प्रतिशत बढ़ गया है.
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने अल-जौर रिफाइनरी के पूरी तरह से चालू होने के बाद रिकॉर्ड 1.21 मिलियन बैरल प्रतिदिन का उत्पादन हासिल किया है. बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो शीर्ष 10 कमर्शियल बैंकों में औसतन 21.8 प्रतिशत की लिक्विडिटी है. यह मजबूत बैंकिंग व्यवस्था इन देशों की आर्थिक स्थिरता को और ज्यादा सुरक्षित बनाती है.




