अमेरिका और ईरान युद्ध का दिखा असर, भारत में 2 नागरिकों की मौत, देश में LPG गैस को लेकर सरकार अलर्ट
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक गंभीर रूप ले चुका है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) एमके नारायणन ने बुधवार को चेतावनी दी कि यह युद्ध लंबा खिंच सकता है। इसका असर सिर्फ ईरान पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा। इस बीच विदेश मंत्रालय ने भी युद्ध को लेकर एक दुखद खबर साझा की है और भारत में गैस सप्लाई को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
भारत पर युद्ध का असर और नागरिकों की स्थिति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस युद्ध में दो भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि की है। इसके अलावा एक व्यक्ति अभी भी लापता बताया जा रहा है। तेहरान में मौजूद भारतीय दूतावास हाई अलर्ट पर है और वहां फंसे नागरिकों को जमीनी रास्ते से सुरक्षित निकालने का काम कर रहा है। पूर्व डिप्टी NSA पंकज सरन ने सरकार से अपील की है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत के रास्ते खुले रखे जाएं। भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ‘India First’ कूटनीति के तहत काम कर रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हालात का जायजा लेने के लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से फोन पर बात की है।
देश में गैस और पेट्रोल पर क्या होगा असर?
खाड़ी देशों में हो रहे इस भारी संघर्ष का सीधा असर भारत की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। इसे देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू LPG गैस उत्पादन को 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है ताकि आम लोगों को गैस की किल्लत ना हो।
- देश की सभी रिफाइनरियां इस समय अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।
- केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGPs) के साथ हाई लेवल बैठक कर LPG वितरण सुनिश्चित करने को कहा है।
- हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के अधिकारियों ने कहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में गैस की राशनिंग करनी पड़ सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति का क्या है बयान?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि ईरान के साथ यह युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। उनका कहना है कि लगातार हो रहे हवाई हमलों के बाद अब ईरान में निशाना बनाने के लिए कुछ खास नहीं बचा है। हालांकि, ईरान भी खाड़ी में मौजूद अमेरिकी बेस और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है। इसके अलावा, युद्ध के कारण डिजिटल सुरक्षा एजेंसियां भी ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराध को लेकर हाई अलर्ट पर हैं।




