Gulf Waters में फसे 768 भारतीय नाविक, ओमान के पास हमले के बाद हालात हुए खराब.

Nura Basta28 September 20263 min read7 viewsExpat Issues
Gulf Waters में फसे 768 भारतीय नाविक, ओमान के पास हमले के बाद हालात हुए खराब.

खाड़ी देशों के समुद्र में सुरक्षा के हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, जिससे वहां काम करने वाले भारतीय प्रवासियों और नाविकों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। शिपिंग महानिदेशालय यानी Directorate General of Shipping (DGS) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कुल 768 भारतीय क्रू मेंबर इस समय खाड़ी के पानी में फंसे हुए हैं। ये लोग अलग-अलग 28 भारतीय-ध्वज वाले टैंकरों और कार्गो जहाजों पर सवार हैं। यह पूरा संकट ओमान के मुसंदम तट के पास 23 सितंबर 2026 को एंटीगुआ और बारबुडा के जहाज MV Cape Dao पर हुए एक खतरनाक हमले के बाद शुरू हुआ, जिसने समंदर में काम कर रहे भारतीय कामगारों और उनके परिवारों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

ओमान तट के पास हुआ था खतरनाक हमला

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, MV Cape Dao जहाज यूएई के मीना साक़र से भारत की तरफ आ रहा था। दोपहर के समय अज्ञात प्रोजेक्टाइल यानी मिसाइलनुमा वस्तु से इस पर हमला किया गया, जिससे जहाज के इंजन रूम और अक्कमडेशन डेक में भयंकर आग लग गई। इस हादसे में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कर्माजीत पुर गांव के रहने वाले 26 वर्षीय सूरज यादव की सिर में गंभीर चोट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। सूरज इस जहाज पर वाइपर के तौर पर काम करते थे। हालांकि ओमान की रॉयल नेवी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बाकी के 19 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया, लेकिन सूरज यादव का शव अभी तक उनके परिवार तक नहीं पहुंच पाया है। सूरज के परिवार के लिए यह सदमा बहुत बड़ा है क्योंकि उनके पिता वर्तमान में मस्कट में काम कर रहे हैं, जबकि उनकी मां और छोटे भाई अपने पैतृक गांव में ही रहते हैं। सूरज ने अपनी इस आखिरी समुद्री ड्यूटी पर जाने के लिए 19 अगस्त को घर छोड़ा था।

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खाड़ी देशों में कुल कितने भारतीय नाविक मौजूद हैं

डीजीएस के आंकड़ों के अनुसार, इस समय पूरे खाड़ी क्षेत्र में लगभग 23,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें अकेले यूएई में 12,830, सऊदी अरब में 3,131, कतर में 2,372, ओमान में 1,687 और बहरीन में 276 भारतीय काम कर रहे हैं। सुरक्षा के इन बिगड़ते हालातों के बीच बहरीन और मस्कट से कुल 215 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। लेकिन बाकी बचे 768 लोग अब भी उन 28 stranded ships यानी फंसे हुए जहाजों पर ही मौजूद हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बीमा कंपनियों और जहाज मालिकों द्वारा कमर्शियल ट्रैफिक पर रोक लगाने के कारण इन जहाजों पर पीने के साफ पानी और ईंधन की भारी किल्लत शुरू हो गई है, जिससे वहां फंसे लोगों का जीवन बेहद कठिन हो गया है।

सरकार और यूनियनों की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर भारत सरकार भी पूरी तरह गंभीर नजर आ रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 23 सितंबर को एक आधिकारिक बयान जारी करके इस हमले की कड़ी निंदा की और ओमान के अधिकारियों द्वारा बचाए गए लोगों के लिए किए गए राहत कार्यों की सराहना की। इसके अलावा शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यह भरोसा दिलाया है कि मृतक सूरज यादव के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके घर वापस लाया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया अभी पूरी की जा रही है। दूसरी ओर, फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए वित्तीय मुआवजे की मांग की है, साथ ही एक चौबीसों घंटे यानी 24x7 क्राइसिस रिस्पांस सेल बनाने और भारतीय तथा विदेशी झंडों वाले जहाजों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों को पुख्ता नौसैनिक सुरक्षा देने की जोरदार मांग की है ताकि खाड़ी के समंदर में सफर कर रहे हमारे देशवासियों की जान की रक्षा की जा सके।

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