महमूद अब्बास ने फ़िलिस्तीन में चुनाव टाले, अब सितंबर 2027 में होंगे

फ़िलिस्तीन: फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने आख़िरकार वह फ़ैसला ले लिया, जिसकी चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी। 28 नवंबर 2026 को होने वाले विधायी चुनाव अब टल गए हैं, और विधायी के साथ राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए नई तारीख़ 11 सितंबर 2027 तय की गई है। शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक आदेश के ज़रिए यह फ़ैसला औपचारिक किया गया। सरकारी समाचार एजेंसी WAFA ने इसकी जानकारी दी।
फ़ैसले की वजह राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक हालात में आई गिरावट बताई गई है। प्राधिकरण के उपराष्ट्रपति हुसैन अल-शेख़ ने 8 अक्टूबर 2026 को फ़्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बार्रो को एक पत्र भेजकर बताया कि समावेशी और स्वतंत्र चुनाव के लिए ज़रूरी माहौल अब तक नहीं बन पाया है। उनके मुताबिक़ चुनाव की निष्पक्षता पर बुनियादी सवाल खड़े हैं। आंतरिक मूल्यांकन के बाद अधिकारियों ने ही नई तारीख़ की सिफ़ारिश की।
फ़िलिस्तीनी गुटों के भीतर भी इस पर अलग-अलग राय सामने आई है। इस्लामिक जिहाद के उप महासचिव मोहम्मद अल-हिंदी ने कहा कि काहिरा में बनी आम सहमति के तहत चुनाव टालने पर सहमति बनी, ताकि राष्ट्रीय संवाद आगे बढ़ सके। हमास के राजनीतिक ब्यूरो सदस्य बासिम नईम ने इस फ़ैसले का समर्थन किया और कहा कि शुरुआती समय-सीमा जल्दबाज़ी वाली थी। वहीं डेमोक्रेटिक फ़्रंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ पैलेस्टाइन (DFLP) के हेल्मी अल-अराज ने चेतावनी दी कि इससे प्राधिकरण की साख को नुक़सान हो सकता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से शासन का रास्ता कमज़ोर पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ और अंदर की बात
इज़राइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने अब्बास पर आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव रद्द करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धोखा दिया है। दूसरी ओर यूरोपीय संघ ने चुनाव प्रक्रिया में सहयोग देने की अपनी तैयारी दोहराई और इज़राइली अधिकारियों से अपील की कि फ़िलिस्तीनी सभी इलाक़ों में मतदान की सुविधा दें। फ़्रांस के प्रवक्ता पास्कल कोंफ़ावरो ने कहा कि चुनाव ज़रूरी हैं, ख़ासकर सितंबर 2025 में फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने के बाद।
क़ानूनी विशेषज्ञ और पूर्व PLO प्रवक्ता दानिया बुट्टू ने इस क़दम को लोकतांत्रिक भागीदारी का अंत बताया और अब्बास के कार्यकाल बढ़ने को सत्तावादी रवैया कहा। हालाँकि एक फ़िलिस्तीनी सूत्र के मुताबिक़ यह टलना अप्रत्याशित नहीं था, क्योंकि प्रमुख गुट चुनाव के लिए उम्मीदवार सूची तैयार नहीं कर पाए थे और निजी तौर पर स्थगन की वकालत कर रहे थे। अब सबकी नज़रें आने वाले महीनों में इस बात पर होंगी कि क्या सितंबर 2027 तक हालात चुनाव के अनुकूल बनते हैं।