Abu Dhabi Court: यूएई में बच्चे को नैनी के भरोसे छोड़कर विदेश जाना पड़ा भारी, मां पर लगा 80,000 दिरहम का जुर्माना.

Praggya Singh sabal26 August 20262 min read70 viewsUAE
Abu Dhabi Court: यूएई में बच्चे को नैनी के भरोसे छोड़कर विदेश जाना पड़ा भारी, मां पर लगा 80,000 दिरहम का जुर्माना.

अबू धाबी की एक फैमिली कोर्ट ने एक ब्रिटिश मां के खिलाफ सुनाए गए फैसले को बरकरार रखा है और उन पर Dh80,000 का भारी जुर्माना लगाया है। यह मामला एक कस्टडी विवाद से जुड़ा हुआ है जिसे महिला के पूर्व पति यानी बच्चे के पिता ने अदालत में उठाया था। पिता का आरोप था कि महिला ने अपनी तीन साल की बेटी को बिना किसी अपने परिजन की देखरेख के, सिर्फ एक नैनी या घरेलू सहायिका के भरोसे आठ दिनों के लिए छोड़ दिया था और खुद विदेश यात्रा पर चली गई थी। कोर्ट ने जब इस मामले की पूरी जांच की तो सामने आया कि मां के पीछे से बच्ची की तबीयत खराब हो गई थी और उसे मेडिकल केयर यानी चिकित्सीय सहायता की जरूरत पड़ी थी। इस बात का पता चलने पर अदालत के जज ने मां के इस कदम की कड़ी आलोचना की और जुर्माने के फैसले को सही ठहराया।

संयुक्त कस्टडी और माता-पिता की जिम्मेदारी

अदालत के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि यूएई की अदालतें बच्चों की ज्वॉइंट कस्टडी यानी संयुक्त कस्टडी के नियमों को लेकर कितनी सख्त हैं। कोर्ट ने साफ किया कि अगर दूसरा पेरेंट यानी पिता देश में ही मौजूद है और बच्चे की देखभाल करने में पूरी तरह सक्षम है, तो ऐसी स्थिति में बच्चे को अकेले नौकरों के भरोसे छोड़कर जाना कानूनन गलत है। हालांकि अदालत ने घरेलू सहायिकाओं या नैनी रखने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है, लेकिन जज ने साफ चेतावनी दी है कि भविष्य में अगर कस्टडी के नियमों या बच्चों की देखभाल के समझौतों का इस तरह उल्लंघन किया गया, तो मां या पिता के खिलाफ और भी ज्यादा सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों की क्या है राय

इस मामले पर बात करते हुए जाने-माने लीगल एक्सपर्ट Byron James ने बताया कि यह फैसला सभी माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घर पर काम करने वाले लोग रखना कोई अपराध नहीं है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल तब माना जाता है जब इसका उपयोग दूसरे पेरेंट के अधिकारों को दबाने या उन्हें बच्चे की देखभाल से दूर रखने के लिए किया जाए। यह पूरा फैसला यूएई के नए और आधुनिक कानूनी ढांचे के मुताबिक है, जो मुख्य रूप से Federal Decree-Law No. 41 of 2024 और Abu Dhabi Law No. 14 of 2021 के तहत काम करता है। इन कानूनों में सबसे ऊपर बच्चे के हितों को रखा जाता है और सिविल मामलों में ज्वॉइंट कस्टडी को ही मुख्य नियम बनाया गया है ताकि बच्चे की मानसिक और शारीरिक सेहत हमेशा अच्छी बनी रहे और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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