Adidas पर भड़का लोगों का गुस्सा, कैंपेन में इस्राइली पूर्व सैनिक को शामिल करने पर हो रहा है बायकॉट का ऐलान।

दुनिया की मशहूर स्पोर्ट्सवियर कंपनी Adidas इन दिनों एक बड़े विवाद में फंस गई है और सोशल मीडिया पर इसे बायकॉट करने की मांग तेजी से उठ रही है। यह पूरा मामला कंपनी के 'Single-Shoe Service' मार्केटिंग कैंपेन से जुड़ा है, जिसमें Shalev Biton नाम के इस्राइली पूर्व सैनिक को शामिल किया गया था। इस सैनिक ने 26 अगस्त 2026 को इंस्टाग्राम के जरिए इस कैंपेन में अपनी हिस्सेदारी की घोषणा की थी, जिसके बाद से ही लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आम लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि कंपनी का यह कदम पूरी तरह से असंवेदनशील है।
कम्पेन को लेकर क्यों हो रहा है विरोध
प्रो-Palestinian कार्यकर्ताओं और बायकॉट कैंपेन चलाने वाले कई जाने-माने चेहरों ने इस कैंपेन को फिलिस्तीनियों के साथ एक बड़ा धोखा बताया है। इन विरोध करने वालों में Susan Abulhawa, Leyla Hamed, Hend Amry, Fatima Bhutto और Abeer Khatib जैसे बड़े नाम शामिल हैं। आलोचकों का तर्क है कि Adidas एक तरफ तो सबको साथ लेकर चलने यानी समावेशिता की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे सैनिक को चुनती है जो 2021 के गाजा संघर्ष में शामिल रहा था। आलोचकों का यह भी कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई के कारण गाजा में बच्चों के अंग कटने की दर काफी ज्यादा बढ़ गई थी, जिसे कंपनी ने नजरअंदाज कर दिया।
Adidas ने दी अपनी सफाई
आपको बता दें कि Adidas ने अपनी इस 'Single-Shoe Service' योजना को पूरी दुनिया में जनवरी 2026 में शुरू किया था। इस योजना का मकसद उन लोगों की मदद करना था जिनके शरीर के अंग में भिन्नता है, ताकि वे जोड़े के मुकाबले सिर्फ एक जूता आधे यानी 50% दाम पर खरीद सकें। कंपनी का यह कहना है कि इस प्रोग्राम को ब्रिटिश पैरालंपिक एसोसिएशन जैसे विकलांगता संगठनों के साथ मिलकर तैयार किया गया था। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसे खासतौर पर इस्राइल या वहां के सैन्य कर्मियों के लिए नहीं बनाया गया था। बढ़ते विवाद को देखते हुए कंपनी ने एक बयान जारी कर यह माना कि इस सेवा के असली मकसद को लोगों ने गलत तरीके से समझ लिया है, जबकि यह केवल एक वैश्विक पहुंच और मदद से जुड़ा कार्यक्रम है।
सोशल मीडिया पर अभी भी जारी है मुहिम
इस पूरे मामले पर 5 सितंबर 2026 तक भी लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ है। 'Land Palestine' और 'Eye on Palestine' जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स लगातार इस बात की वकालत कर रहे हैं कि इस ब्रांड का बहिष्कार किया जाना चाहिए। इससे यह साफ पता चलता है कि जब बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल में अपने उत्पादों का प्रचार करती हैं, तो उन्हें किस तरह की बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। गल्फ देशों और दुनिया भर में रहने वाले आम लोग भी इस तरह के मामलों पर कड़ी नजर रखते हैं, क्योंकि कंपनियों की ऐसी नीतियां सीधे तौर पर सामाजिक भावनाओं को प्रभावित करती हैं।