पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अफगान शरणार्थियों ने पुलिस उत्पीड़न और जबरन वसूली के लगाए आरोप
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल के बाद अफगान शरणार्थियों ने पुलिस उत्पीड़न और जबरन वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस्लामाबाद (पाकिस्तान): पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से निकाले गए अफगान नागरिकों ने वहां पुलिस द्वारा उत्पीड़न और जबरन वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं। शरणार्थियों का कहना है कि प्रांत में गवर्नर रूल और आपातकाल लागू होने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार बढ़ा है, जिसमें आधी रात को घरों पर छापेमारी और मनमाने ढंग से हिरासत में लेना शामिल है।
वापस लौटे लोगों ने बताया कि उनकी दिनचर्या बेहद कठिन हो गई थी। पुलिस अक्सर उनके घरों की तलाशी लेती थी और उनके आने-जाने पर पाबंदियां लगा दी गई थीं। कई लोगों ने यह भी दावा किया कि उन्हें मामूली बहानों से पकड़ा जाता था और रिहा करने के बदले पुलिसकर्मी उनसे रिश्वत मांगते थे।
मोहम्मद रहमान नाम के एक व्यक्ति ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनका परिवार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समय पंजाब से खैबर पख्तूनख्वा आया था क्योंकि वहां हालात बेहतर थे। लेकिन इस्लामाबाद द्वारा आपातकाल और गवर्नर रूल लागू करने के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वे गिरफ्तारी के डर से घर से बाहर निकलने में भी डरने लगे थे।
एक अन्य निर्वासन पीड़ित सोहेल खान ने कहा कि अधिकारी रात के समय घरों पर छापेमारी करते थे। वहीं दिन के समय स्थानीय बाजारों में शरणार्थियों को निशाना बनाया जाता था और उन्हें डरा-धमकाकर पैसे वसूले जाते थे। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें उनके कार्यस्थलों से उठाया गया और अपमानजनक व्यवहार के बाद वापस भेज दिया गया।
पिछले तीन महीनों में करीब 27 हजार अफगान शरणार्थी तोरखम बॉर्डर के जरिए वापस अफगानिस्तान जा चुके हैं। तोरखम के पास ओमरी अस्थायी बस्ती के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आने वाले लोगों की मदद के लिए 12 सहायता समितियां काम कर रही हैं।
इधर, तालिबान के नेतृत्व वाले शहरी विकास और आवास मंत्रालय ने बताया कि लौटने वाले परिवारों को 22 प्रांतों में 74 हजार से ज्यादा आवासीय भूखंड बांटे गए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, 27 टाउनशिप में जमीन तय की गई है और पुनर्वास के लिए 37 मास्टर डेवलपमेंट ब्लूप्रिंट को मंजूरी दी गई है।