अफगानिस्तान में एचआईवी मरीजों की बढ़ती संख्या और अंतरराष्ट्रीय मदद में कमी से गहराया स्वास्थ्य संकट

काबुल: अफगानिस्तान में एचआईवी संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मदद में भारी गिरावट और सामाजिक भेदभाव की वजह से मरीजों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। मरीजों को न केवल दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उनके अपने परिवार भी उन्हें अपनाने से इनकार कर रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच देश में कम से कम 286 नए एचआईवी संक्रमण दर्ज किए गए हैं। इनमें से 86 मामले अकेले सितंबर 2026 से पहले के पांच महीनों में सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि पड़ोसी देशों से लौटे अफगान प्रवासियों की वजह से संक्रमण की दर बढ़ी है।
काबुल स्थित अफगान-जापान अस्पताल इस बीमारी के इलाज का मुख्य केंद्र बना हुआ है, लेकिन नए मरीजों की बढ़ती भीड़ के आगे यह बेबस नजर आ रहा है। अस्पताल के एचआईवी/एड्स विभाग के प्रमुख मोहम्मद खान हेदायात ने बताया कि पंजीकृत मरीजों की संख्या 2022 में 81 थी, जो 2025-2026 तक बढ़कर 200 हो गई है।
यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) के अनुमान के अनुसार, देश में लगभग 13,000 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं। हालांकि, सामाजिक कलंक और टेस्टिंग की सीमित सुविधाओं के कारण इनमें से ज्यादातर लोगों की पहचान नहीं हो पाई है।
फंडिंग में कटौती और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बदलने से 2025 में कम से कम 422 स्वास्थ्य केंद्र बंद हो गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि महिला कर्मचारियों पर पाबंदियों और वित्तीय संकट की वजह से खासकर महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
तालिवान की नीतियों, जैसे महिलाओं की आवाजाही पर रोक और मेडिकल सेंटरों में जेंडर सेग्रिगेशन ने इलाज की राह और मुश्किल कर दी है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष Rapporteur रिचर्ड बेनेट ने पहले चेतावनी दी थी कि वित्तीय सहायता की कमी और ये नीतियां मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं।
संस्थागत बाधाओं के अलावा, मरीजों को समाज और परिवार के तिरस्कार का सामना करना पड़ रहा है। इस डर से कई लोग अपनी बीमारी के बारे में नहीं बताते और जीवन रक्षक इलाज से दूर रहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चिकित्सा प्रणाली के भीतर भी मरीजों के साथ भेदभाव होता है और कभी-कभी अन्य बीमारियों के इलाज से उन्हें मना कर दिया जाता है।
ग्लोबल सप्लाई चेन में आई दिक्कतों ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय एचआईवी केयर संगठनों में से आधे से ज्यादा ने दवाओं की कमी की बात कही है, जिससे अफगानिस्तान में जरूरी दवाओं की उपलब्धता और कम हो गई है।