नूरिस्तान में हिंसक झड़प के बाद अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान आमने-सामने, लगाए बड़े आरोप.

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे इलाके में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। हाल ही में नूरिस्तान प्रांत में हुई एक बड़ी हिंसा के बाद दोनों देशों की तरफ से गंभीर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके सुरक्षा बलों ने एक बड़े सैन्य अभियान के दौरान बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस पूरी घटना के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं और दोनों पड़ोसी देशों के बीच की दूरियां और अधिक बढ़ गई हैं।
अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय का बड़ा दावा
रविवार, 27 सितंबर 2026 को अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक जानकारी दी गई थी। मंत्रालय के अनुसार, उनके सैन्य बलों ने नूरिस्तान प्रांत के कामदेश जिले में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था। इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने कुल 28 लड़ाकों को मार गिराया था और इसके अलावा 32 अन्य लोगों को जिंदा पकड़ने में सफलता हासिल की थी। अफ़ग़ान सेना का कहना था कि ये सभी लोग एक दिन पहले यानी शनिवार, 26 सितंबर 2026 को सीमा पार करके पाकिस्तान की तरफ से अफ़ग़ानिस्तान में दाखिल हुए थे। उनका मकसद इलाके में अशांति फैलाना और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना था।
अफ़ग़ान अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि ये सभी हमलावर इस्लामिक स्टेट यानी दाएस और नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़े हुए थे। उनका समर्थन पाकिस्तानी मिलिशिया द्वारा किया जा रहा था। अफ़ग़ानिस्तान का यह भी कहना था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने शरण और मोटी सैलरी का झांसा देकर पूर्व अफ़ग़ान सुरक्षा कर्मियों को अपने साथ मिलाया था। इसके बाद उन्हें विशेष ट्रेनिंग कैंपों में प्रशिक्षित किया गया ताकि वे नूरिस्तान में घुसपैठ कर सकें और वहां की शांति व्यवस्था को पूरी तरह से तबाह कर सकें।
पाकिस्तान सरकार ने सभी आरोपों को नकारा
दूसरी तरफ, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने 27 सितंबर को ही अफ़ग़ानिस्तान के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। पाकिस्तानी सरकार ने इन बयानों को पूरी तरह से बेबुनियाद और फालतू बताया। पाकिस्तान ने साफ तौर पर इनकार किया कि नूरिस्तान की झड़पों में उनकी खुफिया एजेंसियों या फिर सुरक्षा बलों का कोई भी हाथ था। इसके अलावा, पूर्व अफ़ग़ान कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने या भर्ती करने के दावों को भी पाकिस्तान ने पूरी तरह गलत बताया। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना था कि अफ़ग़ान प्रशासन द्वारा जारी किए गए वीडियो और विजुअल पूरी तरह से पहले से प्लान किए गए थे। उनका यह भी कहना था कि इन दावों के समर्थन में अफ़ग़ान सरकार की तरफ से कोई भी ठोस सबूत या पहचान पत्र पेश नहीं किया गया है.
अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट का अलग बयान
इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट यानी एएफएफ का बयान सामने आया। उन्होंने अफ़ग़ान सरकार के दावे के बिल्कुल उलट बात कही। एएफएफ का कहना था कि कामदेश में हुई हिंसा की असली वजह तालिबान फोर्सेस थीं, जिन्होंने उनके ठिकानों पर जमीन और ड्रोन के जरिए हमला किया था। इस संगठन का दावा है कि उनके लड़ाकों ने इस हमले का कड़ा मुकाबला किया और जवाबी कार्रवाई की जिसमें तालिबान पक्ष को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उनके कई सैनिक मारे गए।
क्षेत्रीय तनाव और पुरानी घटनाएं
यह ताजा सीमा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही काफी तनाव चल रहा है। इससे पहले 21 सितंबर 2026 को पाकिस्तान की तरफ से अफ़ग़ानिस्तान के अंदर एयरस्ट्राइक की गई थी, जिसमें आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें आई थीं। दोनों देश लंबे समय से एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकी संगठनों को पनाह देने के आरोप लगाते आए हैं। हालांकि, 27 सितंबर को हुई इस घटना की किसी भी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। इलाके के सुरक्षा जानकारों का भी मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के दावों में पूरी सच्चाई नहीं है, क्योंकि असल संघर्ष तालिबान के स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल के खिलाफ चल रहे अंदरूनी विरोध का नतीजा हो सकता है, और पकड़े गए या मारे गए लोग खुद अफ़ग़ान नागरिक ही थे।