एआई तकनीक तक असमान पहुंच से दुनिया में आर्थिक असमानता और गहरा होने का खतरा बताया यूएन अधिकारी ने
यूएन अधिकारी ने चेतावनी दी है कि एआई तकनीक तक असमान पहुंच से दुनिया में आर्थिक अंतर और गहरा हो सकता है।

दोहा (कतर): इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल टोमास लामानाउस्कस ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बुनियादी ढांचे और तकनीक तक असमान पहुंच से वैश्विक असमानता काफी बढ़ सकती है। कतर के दोहा में आयोजित 9वें वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट फोरम में उन्होंने यह बात कही।
लामानाउस्कस ने बताया कि दुनिया भर के डेटा सेंटर की क्षमता का केवल 3.3 प्रतिशत हिस्सा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के पास है। इसके अलावा, दुनिया में अभी भी 220 करोड़ लोग इंटरनेट की सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि इस डिजिटल बुनियादी ढांचे के अंतर को पाटने के लिए 2030 तक 2.8 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित देशों में काम करने वाली उम्र के 29 प्रतिशत लोग जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि विकासशील देशों में यह आंकड़ा केवल 16 प्रतिशत है। साथ ही, एआई अनुवाद टूल केवल 7 प्रतिशत अफ्रीकी भाषाओं को कवर करते हैं, जिससे लाखों लोगों की पहुंच सीमित हो गई है।
लामानाउस्कस के मुताबिक एआई के विकास को रोकना कोई वास्तविक विकल्प नहीं है और कोई भी एक इकाई इस तकनीक को नियंत्रित नहीं कर सकती। फोरम के सत्र में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी संदेश भेजा। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया की सबसे गरीब अर्थव्यवस्थाओं को एआई, सेमीकंडक्टर्स, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश का बहुत छोटा हिस्सा मिल रहा है।
यूएन वर्ल्ड सोशल रिपोर्ट 2026 में कहा गया है कि एआई को तेजी से अपनाने से महिलाओं, युवाओं और दिव्यांगों जैसे कमजोर समूहों के लिए सामाजिक-आर्थिक असमानताएं बढ़ सकती हैं। आईएमएफ और ओईसीडी के अधिकारियों ने भी संकेत दिया कि हालांकि एआई वार्षिक वैश्विक आर्थिक विकास में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है, लेकिन इसका लाभ केवल उन्हीं देशों तक सीमित रह सकता है जो पहले से तैयार हैं।
आईएमएफ के फिस्कल अफेयर्स डिपार्टमेंट की डिप्टी डायरेक्टर एरा डबला-नोरिस ने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एआई को अपनाने और फैलाने की क्षमता को भविष्य की एक बड़ी चुनौती बताया है। इससे पहले दिसंबर 2025 की एक यूएनडीपी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि यदि एआई तैयारी का यह अंतर बना रहा, तो दुनिया में एक बड़ी आर्थिक खाई पैदा हो सकती है।