सुरक्षा खतरों के चलते एयर फ्रांस ने रियाद और दुबई के लिए अपनी उड़ानें और आगे तक स्थगित कीं
सुरक्षा खतरों के कारण एयर फ्रांस ने रियाद और दुबई के लिए अपनी उड़ानों के निलंबन की अवधि बढ़ा दी है।

पेरिस: क्षेत्रीय सुरक्षा स्थितियों में आए बदलावों को देखते हुए एयर फ्रांस ने रियाद और दुबई के लिए अपनी उड़ानों के निलंबन की अवधि बढ़ा दी है। अब कंपनी की रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए उड़ानें 12 दिसंबर 2026 तक और दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए उड़ानें 7 नवंबर 2026 तक बंद रहेंगी।
एयरलाइन ने बताया कि यह फैसला यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। इससे पहले ये पाबंदियां 31 अक्टूबर 2026 को खत्म होने वाली थीं, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण इन्हें आगे बढ़ा दिया गया है।
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों की वजह से कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सिरियम के एविएशन डेटा के मुताबिक, 8 से 25 अक्टूबर 2026 के बीच तय की गई 4,736 उड़ानों में से 4,071 रद्द कर दी गईं, जिससे करीब 90 प्रतिशत उड़ानें जमीन पर रह गईं।
हालांकि 25 अक्टूबर 2026 को एयरपोर्ट को आंशिक रूप से फिर से खोला गया था, लेकिन अगले ही दिन हूतियों ने इस सुविधा को सैन्य लक्ष्य घोषित कर दिया। हूतियों ने चेतावनी दी है कि यह जगह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के लिए असुरक्षित है।
सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 29 अक्टूबर 2026 को रियाद की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और पूर्वी क्षेत्र की ओर दागी गई तीन मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर दिया गया। इस अस्थिरता का असर पूरे सऊदी विमानन क्षेत्र पर पड़ा है, जहां 8 से 25 अक्टूबर के बीच कुल निर्धारित प्रस्थानों में से 45 प्रतिशत यानी 7,800 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं।
दम्माम और अबहा हवाई अड्डों पर भी उड़ानें रद्द होने की दर क्रमशः 42 प्रतिशत और 46.7 प्रतिशत रही। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अमेरिका के विदेश विभाग ने 23 अक्टूबर 2026 को गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मियों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया था।
इसके बाद 28 अक्टूबर 2026 को एक सुरक्षा अलर्ट जारी कर अमेरिकी नागरिकों को सऊदी हवाई अड्डों पर अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता के लिए अपना समर्थन जताया है।
अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा सलाह को अपडेट किया है, जिसमें क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के बढ़ते जोखिम का जिक्र किया गया है।