Al-Aqsa Compound: जेरूसलम में भड़का तनाव, सैकड़ों इसराइली प्रवासियों ने अल-अक्सा परिसर में की पूजा

जेरूसलम के पवित्र Al-Aqsa Mosque परिसर में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब भारी संख्या में इसराइली लोग वहां जबरन घुस आए। इस घटना के बाद से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में चिंता का माहौल बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी आलोचना की जा रही है। आम लोगों और विभिन्न देशों की सरकारों ने इस कदम को धार्मिक शांति के खिलाफ एक बड़ा खतरा बताया है।
घटना की पूरी जानकारी और तारीख
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 13 September 2026 की है। इस दिन लगभग 240 से 250 इसराइली नागरिक मोरक्को गेट के रास्ते अल-अक्सा मस्जिद परिसर के अंदर दाखिल हुए। इस दौरान इसराइली पुलिस और सैनिकों ने उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान की। परिसर के अंदर इन लोगों ने पारंपरिक अनुष्ठान किए और इसराइल का राष्ट्रीय गान भी गाया। यह पूरा क्षेत्र कुल 144 dunums में फैला हुआ है और इसे पूरी तरह से एक इस्लामिक पूजा स्थल माना जाता है।
कानूनी समझौते और पुराना इतिहास
नियमों के अनुसार, साल 1967 के स्टेटस को समझौते और 1994 की इसराइली-जॉर्डन शांति संधि के तहत, जेरूसलम अवकाफ और अल-अक्सा मस्जिद मामलों के विभाग के पास ही इस स्थल की पूरी कानूनी देखरेख का अधिकार है। इस समझौते के मुताबिक इस पवित्र जगह पर केवल मुसलमानों को ही प्रार्थना करने की अनुमति दी गई है। इसके बावजूद इस तरह की गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं।
जॉर्डन सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर जॉर्डन के विदेश और प्रवासी मामलों के मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता Fuad Majali ने इस घटना को ऐतिहासिक और कानूनी समझौते का खुला उल्लंघन करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह इसराइल द्वारा इस पवित्र स्थल पर जबरन नई व्यवस्था थोपने की एक सोची-समझी कोशिश है। जॉर्डन, जो इस जगह का आधिकारिक संरक्षक है, ने इस मामले को लेकर अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो यह एक बड़े धार्मिक संघर्ष का रूप ले सकता है।
तनाव का पुराना इतिहास और अन्य देशों का रुख
इस साल हालात पहले से ही काफी नाज़ुक बने हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल January से August 2026 के बीच इसराइली नागरिकों द्वारा अल-अक्सा परिसर में घुसपैठ की 40,000 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इसके अलावा, साल की शुरुआत से अब तक लगभग 800 फिलिस्तीनियों को इस परिसर में आने से रोकने के लिए बेदखली के आदेश जारी किए गए हैं।
घटना से ठीक एक दिन पहले यानी 12 September 2026 को फिलिस्तीनी नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष Rawhi Fattouh ने भी चेतावनी दी थी कि यह सब ताकत के बल पर इस जगह की स्थिति को बदलने का खतरनाक प्रयास है। इस घटना के बाद Türkiye, UAE, Indonesia, Qatar, Egypt, Pakistan और Saudi Arabia सहित कई देशों ने संयुक्त रूप से इसकी निंदा की है। इन सभी देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे चरमपंथी मंत्रियों और सुरक्षा बलों की ऐसी हरकतों के खिलाफ एक सख्त रुख अपनाएं। आप इस बारे में अधिक जानकारी QNA News की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पढ़ सकते हैं।