अल-बायदा में हूती बलों के खिलाफ जनजातीय गोलबंदी तेज

यमन में बढ़ते संघर्ष के बीच देश के हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ताजा घटनाक्रम में अल-बायदा गवर्नरेट के जनजातीय नेताओं ने अपने लोगों से आगे आने और हूती मिलिशिया के खिलाफ डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया है। इस जनजातीय गोलबंदी ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां स्थानीय आबादी अब मिलिशिया के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए खुद सड़कों पर उतर रही है।
यमीनी सेना का कड़ा रुख
एक तरफ जहां स्थानीय जनजातियां हूती विद्रोहियों का विरोध कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यमीनी सशस्त्र बलों ने भी आक्रामक रुख अपनाया हुआ है। हाल ही में सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुजैली ने एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकारी बलों ने तुर अल-बाहा मोर्चे और तािज़ अक्ष पर हूती मिलिशिया के खिलाफ कई सटीक हमले किए। इन ऑपरेशनों में भारी मात्रा में हथियारों और सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया गया, जिससे विद्रोहियों को बड़ा झटका लगा है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, इन अभियानों में लड़ाकू विमानों, ड्रोन, तोपखाने और स्नाइपरों की मदद ली गई, जिससे मिलिशिया को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न मोर्चों पर हुई तीव्र झड़पों और हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, विशेष तौर पर तािज़ और उसके पश्चिमी हिस्सों में लगातार संघर्ष जारी है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता और नागरिकों की सुरक्षा
इस बीच, जमीन पर भड़कती हिंसा और सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने तािज़ के घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह के बढ़ते संघर्ष और सैन्य गतिविधियों से आम नागरिकों की जान को भारी खतरा पैदा हो रहा है, जिन्हें सुरक्षित रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।