Al Jazeera Podcast: अल-अक्सा मस्जिद और तीसरे मंदिर के निर्माण की इच्छा पर नया विवाद शुरू.

Aanya20 September 20262 min read1 viewWorld
Al Jazeera Podcast: अल-अक्सा मस्जिद और तीसरे मंदिर के निर्माण की इच्छा पर नया विवाद शुरू.

अलजजीरा के पॉडकास्ट #DejaVu में अल-अक्सा मस्जिद के पवित्र स्थल पर तीसरे मंदिर को बनाने की इच्छाओं और उससे जुड़े तनाव पर विस्तार से बात की गई। इस एपिसोड को होस्ट Mohamed Hamza ने किया और इसमें एंटी-जियोनिस्ट नेटुरी कारता आंदोलन के सदस्य Rabbi Haim Sofer का इंटरव्यू लिया गया। यूके के एक ऑर्थोडॉक्स रब्बी सोफर ने यहूदी और मुस्लिम रिश्तों के इतिहास पर बात की और आधुनिक जियोनिज्म की आलोचना की। यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब इस पवित्र स्थल को लेकर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिसे यहूदी लोग टेंपल माउंट और मुसलमान हरम अल-शरीफ के नाम से पुकारते हैं।

तनाव और सुरक्षा के बीच हालिया गतिविधियां

बीते 20 सितंबर 2026 को लगभग 570 इसराइली सेटर्स यानी बस्तियों के लोग भारी पुलिस सुरक्षा के बीच योम किप्पुर से पहले धार्मिक रस्में निभाने के लिए अल-अक्सा परिसर के अंदर गए थे। यह घटना रामल्ला के पास एक इसराइली सेटर की गोलीबारी में हुई मौत के ठीक उसी समय के आस-पास हुई। इस पवित्र स्थल का प्रशासनिक नियंत्रण लंबे समय से चले आ रहे 'Status Quo' यानी यथास्थिति के नियमों के अधीन है। इस नियम को साल 1994 की जॉर्डन और इसराइल के बीच शांति संधि के जरिए फिर से पक्का किया गया था। इस समझौते के तहत इस्लामिक वक्फ इस परिसर का प्रबंधन संभालता है और गैर-मुसलमानों को बिना प्रार्थना के केवल पर्यटन के रूप में आने की अनुमति देता है। इस बारे में अधिक जानकारी gov.il पर दी गई है।

मंदिर समूहों की सक्रियता और कानूनी कार्रवाई

हाल के हफ्तों में कई 'टेंपल ग्रुप्स' ने इस यथास्थिति को बदलने के लिए अपनी राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। फिलिस्तीनी अधिकारियों, जिनमें जेरूसलम गवर्नरेट, हमास और बंदोबस्त तथा धार्मिक मामलों के मंत्रालय शामिल हैं, ने शनिवार को सेटर्स के लिए मस्जिद को खोलने के प्रयासों पर कड़ी चेतावनी दी है। इन समूहों ने बीते 27 अगस्त 2026 को एक सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें इसराइल के कम्युनिकेशंस मिनिस्टर Shlomo Karhi और नेसेट के सदस्य Amit Halevi शामिल हुए थे। जेरूसलम मामलों के विशेषज्ञ Fakhri Abu Diab ने इस बात पर जोर दिया कि मर्सी गेट के पास चल रही ये गतिविधियां जमीन पर एक नई सच्चाई थोपने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। इसके अलावा, इसराइली सुप्रीम कोर्ट में 16 सितंबर 2026 को इन प्रवेश मांगों को लेकर एक याचिका पर सुनवाई तय की गई थी। हालांकि इस सबके बीच इसराइल की मुख्य रब्बीनेट धार्मिक पवित्रता के नियमों का हवाला देते हुए यहूदियों के इस स्थल पर प्रवेश पर अपनी पारंपरिक रोक जारी रखती है।

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