यमन में बड़ा सैन्य बदलाव, अंसार अल्लाह ने बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य पर किया कब्जा.

मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब 11 सितंबर 2026 को अंसार अल्लाह यानी हुती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर के पूरे तट और मयून, ग्रेटर हनिश तथा लेसर हनिश जैसे महत्वपूर्ण द्वीपों पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल कर लिया। इस बड़े सैन्य कदम के बाद हुती गुट का सीधा अधिकार यमन की तरफ के बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य पर हो गया है, जो दुनिया भर की शिपिंग और स्वेज नहर के रास्ते के लिए बहुत अहम समुद्री मार्ग माना जाता है।
सैनिकों का बयान और समुद्री नियम
समूह के सैन्य प्रवक्ता याहया सारेई ने इस कब्जे की पुष्टि करते हुए साफ किया कि सभी जहाजों के लिए समुद्री नेविगेशन सुरक्षित है, लेकिन सऊदी अरब के जहाजों पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हुती समूह की तरफ से इसे नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी की नीति बताया गया है। ईरान के नेतृत्व ने इस कदम की खुलकर तारीफ की है और सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोख्बेर ने इसे एक बड़ी जीत करार दिया है। चाटम हाउस के रिसर्च फेलो फारेआ अल-मुस्लिमी ने बताया कि इस घटना के बाद मध्य पूर्व के दो सबसे अहम समुद्री रास्ते यानी हॉर्मूज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदाब दोनों पर ईरान का प्रभाव बढ़ गया है।
मानवीय संकट और जानमाल का नुकसान
इस सैन्य संघर्ष की वजह से आम लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की माइग्रेशन एजेंसी ने 11 सितंबर को जानकारी दी कि इस लड़ाई में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 46,000 लोग अपना घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। यमन में संयुक्त राष्ट्र के दूत अब्दुल्ला अल-सादी ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल को चेतावनी दी है कि हुती विद्रोही लाल सागर में एक नया माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं सऊदी समर्थित यमन सरकार की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसकी निंदा की है।
तेल पाइपलाइन पर हमला और क्षेत्रीय असर
क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तब और बिगड़ गई जब 10 सितंबर को सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर एक ड्रोन से हमला हुआ, जिसके बाद एहतियात के तौर पर पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जादी ने 12 सितंबर को यह कंफर्म किया कि यह हमला इराकी जमीन से ही हुआ था, जिसके बाद उन्होंने एक क्षेत्रीय कमांडर को हटा दिया और इस मामले की जांच के आदेश दिए। बहरीन सरकार ने भी 12 सितंबर को इस पाइपलाइन हमले की कड़ी निंदा की है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आगे की बैठक
इस पूरे मामले पर दुनिया भर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सैन्य दखल देने की बात कही है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मध्य पूर्व के इस संघर्ष को और बढ़ाने को लेकर थोड़ा हिचकिचा रहे हैं। हालांकि जनवरी 2026 से अमेरिका और ब्रिटेन की साझा सैन्य कार्रवाई अंसार अल्लाह के खिलाफ लगातार जारी है। आने वाले समय में स्थिति को संभालने के लिए ईरान के विदेश मंत्रालय ने ओमान में 14 सितंबर को खाड़ी देशों के साथ एक बैठक बुलाई है, जिसमें हॉर्मूज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा की जाएगी।