Arab Interior Ministers Council ने कुवैत और यूएई पर हुए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की

अरब देशों के अंदरूनी मामलों के मंत्रियों की परिषद ने ईरान की तरफ से किए गए हमलों पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। 2 सितंबर 2026 को जारी किए गए आधिकारिक बयान में इस बात की जानकारी दी गई कि ईरान की ओर से लगातार क्षेत्रीय सुरक्षा को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। Council of Arab Interior Ministers के जनरल सचिवालय ने कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के खिलाफ हुई आक्रामकता की निंदा की। इस पूरी घटना के बाद से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों के बीच चिंता का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि इन हमलों का असर सीधे तौर पर आम जनजीवन और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ा तनाव
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरानी सेना का ऐसा दावा था कि यह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हाल ही में हुए हमलों का बदला लेने के लिए किया गया था। इस बारे में अधिक जानकारी WAM News के माध्यम से सामने आई है। क्षेत्रीय स्तर पर इन हमलों का जवाब बहुत तेजी से दिया गया। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन बताया। वहीं बहरीन की रक्षा सेनाओं ने साफ कर दिया कि कई हवाई वस्तुओं को सफलता पूर्वक रोकने के बाद उनका देश अभी भी हाई अलर्ट पर बना हुआ है। जॉर्डन की सेना ने भी यह पुष्टि की कि उन्होंने हवा में ही 13 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक लिया था जिनमें से 10 को नष्ट कर दिया गया जबकि 3 मिसाइलें अक़ाबा शहर के पास सुनसान इलाकों में आकर गिरीं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात को भी इन खतरों का सामना करना पड़ा जहां ईरान ने अल धफरा और अल मिन्हाद एयर बेस पर अमेरिकी रडार और कर्मियों के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इन सभी अपडेट्स की पुष्टि Saudi Press Agency (SPA) द्वारा की गई रिपोर्ट में भी की गई है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आर्थिक प्रतिबंध
इस बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी चेतावनी दी है कि यदि तेहरान की तरफ से दोबारा कोई जवाबी कार्रवाई की जाती है तो उसका बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने एक नए आर्थिक अभियान का ऐलान किया है जिसका मुख्य उद्देश्य ईरानी संस्थाओं को वैश्विक डॉलर-आधारित वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह अलग करना है। अरब संसद के अध्यक्ष Mohammed Yamahi ने भी इन हमलों की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि आने वाले समय में स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोका जा सके। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और स्थानीय प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।