यमन सरकार और नागरिक ठिकानों पर हूती हमलों की अरब लीग ने की कड़ी निंदा और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का लगाया आरोप

अदन: अरब लीग ने यमन सरकार के मुख्यालय और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाकर किए गए हूती हमलों की औपचारिक तौर पर निंदा की है। लीग ने इन हमलों को बहुत खतरनाक बढ़त और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है।
लीग के मुताबिक, सरकारी संस्थानों को लगातार निशाना बनाने से यमन की स्थिरता को खतरा है और राजनीतिक समाधान की कोशिशों को नुकसान पहुंच रहा है। यह बयान 15 अक्टूबर 2026 को अदन स्थित राष्ट्रपति अल-माशिक पैलेस पर हुए हमले के बाद आया है।
इस हमले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के मुख्यालय को निशाना बनाया गया था। इस घटना में प्रधानमंत्री शया अल-जिंदानी के सुरक्षा दल के दो सदस्यों समेत पांच लोगों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हुए। हालांकि, महल में मौजूद प्रधानमंत्री और कैबिनेट सदस्य सुरक्षित रहे।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने दावा किया कि इस हमले का मकसद सऊदी सैन्य संचालन केंद्र और हथियारों के डिपो को नष्ट करना था।
अरब लीग ने यमन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और उसकी सरकार की वैधता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। लीग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हूती कार्रवाइयों को रोकने और यमन के संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है।
लीग ने 15 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जारी उस अध्यक्षीय बयान का भी समर्थन किया है, जिसमें नागरिकों के खिलाफ शत्रुता को तुरंत समाप्त करने की मांग की गई थी।
अक्टूबर 2026 में तनाव और बढ़ गया है। 7 से 11 अक्टूबर के बीच सऊदी अरब के रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूतियों ने ड्रोन और मिसाइलों से 20 अलग-अलग हमले किए। इन हमलों में 17 लोगों की जान गई और 333 लोग घायल हुए।
दूसरी ओर, यमन सरकार 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के जरिए मिलिशिया के कब्जे वाले इलाकों को वापस पाने के लिए जवाबी कार्रवाई कर रही है। अदन के स्थानीय अधिकारियों ने भी नागरिक क्षेत्रों पर हमलों की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की अनदेखी बताया है।