Arab Parliament ने की ईरान की आलोचना, Jordan और UAE पर हमले के बाद बढ़ा तनाव.

अरब संसद के अध्यक्ष Mohammed Yamahi ने 31 अगस्त 2026 को जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात पर हाल ही में हुए ईरानी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है। इन हमलों में मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया था, जिन्होंने जॉर्डन के किंग हुसैन और अल अजराक़ एयर बेस के अलावा यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब अमेरिकी सेना ने 30 अगस्त 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के लारक द्वीप पर स्थित ईरानी रॉकेट लांचरों पर सैन्य हमले किए थे। इन तमाम सैन्य गतिविधियों के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और आम लोगों के बीच भी तनाव का माहौल देखा जा रहा है।
अधिकारियों की कड़ी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानून
अध्यक्ष Mohammed Yamahi ने ईरान के इन कदमों को जॉर्डन और यूएई की संप्रभुता और स्थिरता पर खुला हमला बताया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यह बढ़ता तनाव सीधे तौर पर अरब देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जॉर्डन और यूएई को अपनी आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है। इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वे इस घटना पर एक सख्त और एकजुट रुख अपनाएं ताकि इलाके में शांति बहाल की जा सके।
जॉर्डन और UAE की सैन्य कार्रवाई
जॉर्डन की सेना ने जानकारी दी कि उसने 31 अगस्त की सुबह अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल होने वाली आठ बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी भी तरह के बुनियादी ढांचे या सैनिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। वहीं दूसरी ओर, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने क्षेत्रीय जल सीमा के ऊपर ईरान की तरफ से आ रहे एक ड्रोन को सफलता पूर्वक रोक लिया। यूएई सरकार ने ईरान के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें अल मिन्हाद एयर बेस पर मिसाइल हमले से भारी नुकसान की बात कही गई थी। यूएई सरकार ने देश के लोगों को आश्वस्त किया है कि उनके सशस्त्र बल पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।
ईरान और अमेरिका का रुख
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इन सभी ऑपरेशनों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उनके हमलों से सैन्य बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है। ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस कार्रवाई को आत्मरक्षा का वैध अधिकार बताते हुए कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन वह किसी भी प्रकार के हमले के सामने चुपचाप नहीं बैठेगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका इन ईरानी हमलों का कड़ा और निर्णायक जवाब देगा। खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC और कतर सरकार ने भी इन हमलों की कड़ी निंदा की है। जीसीसी के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने इस आक्रामकता को एक खतरनाक कदम बताया, जबकि कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन करार दिया है।