गाजा युद्ध कवरेज पर इतिहासकार असल राड का बड़ा बयान, मीडिया रिपोर्टिंग को बताया पत्रकारिता की नाकामी.

मिडिल ईस्ट की जानी-मानी इतिहासकार और एक्टिविस्ट Dr. Assal Rad ने पश्चिमी मीडिया की तरफ से गाजा संघर्ष पर की जा रही रिपोर्टिंग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि गाजा युद्ध को लेकर मीडिया का कवरेज पत्रकारिता के बुनियादी मानकों की एक बहुत बड़ी नाकामी है। उनका ऐसा मानना है कि यह रिपोर्टिंग सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह मीडिया की मिलीभगत और सहमति बनाने की सोची-समझी थ्योरी पर पूरी तरह से काम करती है।
अलजजीरा के इंटरव्यू में हुआ बड़ा खुलासा
हाल ही में 7 September 2026 को अलजजीरा के प्रोग्राम The Listening Post में दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान Dr. Assal Rad ने इस बात पर रोशनी डाली। इस इंटरव्यू को चैनल द्वारा 8 September 2026 को फिर से हाईलाइट किया गया था। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि पारंपरिक पत्रकारिता के उसूलों के हिसाब से देखा जाए तो यह कवरेज पूरी तरह फेल नजर आती है। लेकिन जब इसे सहमति बनाने यानी manufacturing consent के नजरिए से परखा जाता है, तो यह बिल्कुल वैसी ही काम करती जैसी योजना बनाई गई थी।
किताब में किया गया है मीडिया की भूमिका का जिक्र
इतिहासकार Dr. Assal Rad की नई किताब "Don't Say Palestine: How the Media Manufactured Consent for Genocide" बाजार में 7 September to 10 September 2026 के बीच आई है। इस किताब में उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि कैसे मुख्यधारा के मीडिया संस्थान लगातार इजराइल की जिम्मेदारी को कम करके दिखाते हैं। इसके साथ ही फिलिस्तीनियों के खिलाफ बेहद अपमानजनक और इंसानियत को नीचा दिखाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। मीडिया अक्सर फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत और उनके दर्द को बयां करने के लिए पैसिव वॉइस का इस्तेमाल करता है।
भाषा के इस्तेमाल पर उठाए गए हैं गंभीर सवाल
रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमलों में जान गंवाने वालों को "people under 18" या फिर "collateral damage" कहकर पुकारा जाता है। वहीं दूसरी तरफ, इजरायली नागरिकों को साफ तौर पर "children" और "civilians" कहा जाता है। उनके मुताबिक यह पूरा पैटर्न इस बात की गवाही देता है कि मीडिया मानवाधिकारों के इस बड़े संकट और नरसंहार पर पर्दा डालने में पूरी तरह शामिल है।
पत्रकारों और संस्थानों की रिपोर्ट
इस पूरी आलोचना को Al Jazeera Media Institute का भी समर्थन मिला है। संस्थान का कहना है कि बड़े मीडिया हाउस अक्सर इजराइल के बयानों और दावों को चुनौती देने में नाकामयाब रहे हैं। इसकी वजह से इजराइल सरकार पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के बावजूद अपनी जवाबदेही से आसानी से बच निकलती है। इसके अलावा Committee to Protect Journalists (CPJ) ने भी इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि इजराइल बिना किसी ठोस और पुख्ता सबूत के पत्रकारों को उग्रवादी यानी मिलिटेंट करार दे रहा है।
प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों की भूमिका
मीडिया पर नजर रखने वाले समूह FAIR की एक रिपोर्ट में भी हाल ही में इस बात का खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका के 15 prominent US-based media outlets जिसमें CNN, The New York Times, और The Washington Post जैसे बड़े नाम शामिल हैं, उन्होंने बार-बार ऐसी कहानियों को दोहराया है जो फिलिस्तीनी पत्रकारों की हत्याओं के लिए सहमति तैयार करती हैं।
गाजा में जारी है हमलों का दौर
मीडिया में चल रही इस बहस और आलोचना के बीच 8 September 2026 तक गाजा में हिंसा का दौर लगातार जारी है। ताजा रिपोर्ट्स से इस बात की पुष्टि हुई है कि आज हुए इजरायली हमलों में 5 Palestinians की मौत हो गई है, जिनमें 2 children भी शामिल हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र यानी UN के एक रैपोर्टेयर ने चेतावनी दी है कि बमबारी वाली जगहों से मलबे को हटाने की इजराइल की लगातार कोशिशों से युद्ध अपराधों के संभावित सबूतों को बचाने में बहुत बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।