Saudi Arabia: रियाद में आजमगढ़ के क्रेन ऑपरेटर की नींद में मौत, एक हफ्ते बाद वतन पहुंचा शव.

सऊदी अरब की राजधानी Riyadh से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ उत्तर प्रदेश के Azamgarh जिले के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर की अचानक मौत हो गई। मृतक की पहचान 40 साल के Chandrika Yadav के रूप में हुई है, जो रियाद में बतौर क्रेन ऑपरेटर काम कर रहे थे। परिवार के लोग उन्हें प्यार से Rajesh Yadav भी बुलाते थे। इस अचानक हुई घटना से उनके पूरे गांव और परिवार में मातम छा गया है और सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। विदेश में अपनों की इस तरह अचानक मौत होने से एक बार फिर खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की सुरक्षा और सेहत को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।
कैसे हुआ हादसा और क्या थी पूरी घटना
मिली जानकारी के अनुसार, Chandrika Yadav जो कि Singhada village के रहने वाले थे, हमेशा की तरह अपनी शिफ्ट खत्म करके कमरे पर लौटे थे। उन्होंने शाम के समय खाना खाया और सामान्य रूप से सोने के लिए अपने कमरे में चले गए। अगली सुबह जब उनके साथियों ने उन्हें जगाने की कोशिश की, तो वह बिस्तर पर मृत अवस्था में मिले और उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी। उनके साथियों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय कंपनी और अधिकारियों को दी। हालांकि, उनकी मौत के असली कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हुआ है। उनकी कंपनी की तरफ से भी इस मामले में कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है कि मौत की असल वजह क्या थी।
एक हफ्ते की कागजी कार्रवाई के बाद घर आया पार्थिव शरीर
विदेश में किसी भारतीय नागरिक की मौत होने के बाद वहां की कानूनी प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई पूरी करना काफी लंबा काम होता है। Chandrika Yadav के मामले में भी भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर तेजी से काम किया। लगभग एक हफ्ते तक चली प्रशासनिक प्रक्रियाओं, एंबेसी के जरिए मिलने वाली मंजूरियों और फ्लाइट के जरिए शव को लाने के प्रबंध के बाद उनका ताबूत उनके पैतृक गांव पहुँचा। शनिवार, 19 September 2026 की सुबह उनका पार्थिव शरीर उनके घर Singhada पहुँचा, जो कि Gambhirpur police station के अंतर्गत आता है। शव पहुँचते ही परिवार में कोहराम मच गया और अंतिम दर्शन के लिए आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
घर के कमाने वाले मुखिया की अचानक इस तरह अर्थी उठने से पूरे परिवार का भविष्य अधर में लटक गया है। Chandrika Yadav अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ही विदेश गए थे ताकि बच्चों का पालन-पोषण अच्छे से हो सके। उनके पीछे उनके परिवार में उनकी पत्नी Renu Yadav, उनकी बुजुर्ग माँ Lalti Yadav, दो बेटे Saksham और Kishan तथा दो कुंवारी बेटियां Sejal और Sakshi हैं। परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है क्योंकि वही घर के इकलौते सहारे थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स जैसे Amar Ujala, Live Hindustan और Dainik Bhaskar में भी इस घटना को प्रमुखता से उठाया गया है।
प्रवासी मजदूरों की सेहत पर उठ रहे बड़े सवाल
खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय कामगारों के सामने आने वाली समस्याएं किसी से छिपी नहीं हैं। लंबी और थका देने वाली शिफ्ट्स, काम का मानसिक तनाव और कई बार खान-पान व आराम की कमी प्रवासियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। Chandrika Yadav की मौत नींद के दौरान ही हो गई, जिसे कई मामलों में कार्डियक अरेस्ट या दिल का दौरा माना जाता है। हालांकि, जब तक कोई आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक मौत के पुख्ता कारणों के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। ताबूत घर पहुँचने तक परिवार को ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी गई थी जिसमें यह साफ लिखा हो कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण। इस घटना ने एक बार फिर गल्फ देशों में रहने वाले सभी भारतीयों को झकझोर कर रख दिया है।