बाब अल-मंदब पर नियंत्रण को लेकर सऊदी और हूती दावों में टकराव

बाब अल-मंदब, यमन: लाल सागर के रास्ते तेल और माल की आवाजाही के लिए अहम माने जाने वाले बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर अब दो अलग-अलग कहानियाँ सामने हैं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को यमन में सऊदी अरब के राजदूत मोहम्मद अल-जाबेर ने घोषणा की कि इस जलडमरूमध्य से हूती विद्रोही लड़ाकों का आखिरी निशान मिटा दिया गया है। लेकिन हूती नेतृत्व ने इस दावे को सिरे से नकार दिया है, और अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि असल में इलाके पर कब्ज़ा किसका है।
अल-जाबेर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह दिन "मुबारक शुक्रवार" है और यह हर यमनी और हर अरब की जीत है। उनकी इस पोस्ट को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की बड़ी सफलता के रूप में देखा गया।
यमन की सरकारी सेनाओं ने भी इस अभियान की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सऊदी हवाई ताकत के समर्थन से "ऑपरेशन ड्रॉन ऑफ यमन" नाम का बड़ा अभियान शुरू किया गया, जिसका मकसद जलडमरूमध्य और मायुन द्वीप को फिर से अपने नियंत्रण में लेना था। साउथर्न जायंट्स ब्रिगेड्स और नेशन्स शील्ड फोर्सेज़ के सूत्रों के मुताबिक इलाके को सुरक्षित करने के लिए जमीन पर तीखी लड़ाई हुई।
हूती पक्ष का जवाब
हूती प्रवक्ता अमीन हयान ने सऊदी राजदूत के बयान को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि बाब अल-मंदब अब भी हूती नियंत्रण में है। हयान के मुताबिक लहज की ओर से आई सरकारी सेना की बढ़त को हूती लड़ाकों ने रोक दिया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान 22 से ज़्यादा बख्तरबंद वाहन नष्ट किए गए और सरकारी पक्ष को भारी नुकसान हुआ, जिसमें कई कमांडरों की मौत भी शामिल है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
इस इलाके में सैन्य गतिविधि ऐसे समय में तेज़ हुई है जब जुलाई से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद से यह हिंसा का सबसे बड़ा उभार माना जा रहा है।
तनाव को और बढ़ाने वाली घटना गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को हुई, जब रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइल हमला हुआ। इस हमले में तीन सऊदी नागरिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।
बाब अल-मंदब दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, इसलिए यहाँ किसके हाथ में नियंत्रण है, यह सवाल सिर्फ यमन या सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। जब तक दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती, तब तक इलाके की असल तस्वीर पर अनिश्चितता बनी रहेगी, और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता भी।