Bahrain का बड़ा बयान, UAE पर ईरानी ड्रोन हमले की कड़ी निंदा, कहा सुरक्षा और शांति खतरे में.

खाड़ी देशों के बीच आपसी एकजुटता का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बहरीन के अधिकारियों ने संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE पर हुए ड्रोन हमलों को लेकर अपना सख्त रुख साफ कर दिया है। 1 सितंबर 2026 को यूएई की फेडरल नेशनल काउंसिल के स्पीकर Saqr Ghobash को बहरीन की शूरा काउंसिल के चेयरमैन Ali bin Saleh Al Saleh की तरफ से एक औपचारिक संदेश मिला। इस संदेश में बहरीन की सरकार और वहां के लोगों की तरफ से यूएई के प्रति पूरा समर्थन और एकजुटता दिखाई गई है। बहरीन के अधिकारी ने ईरान की तरफ से यूएई पर दोबारा किए गए ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में आलोचना की है और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बताया है।
यूएई की संप्रभुता पर हमला और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन
बहरीन की शूरा काउंसिल के चेयरमैन अली बिन सालेह अल सालेह ने अपने बयान में साफ कहा कि इस तरह के ड्रोन हमले सीधे तौर पर यूएई की संप्रभुता का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने इसे एक खतरनाक escalation बताया जिससे पूरे इलाके की सुरक्षा और स्थिरता खतरे में पड़ रही है। उनका यह भी कहना था कि ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, यूएई सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2817 और पड़ोसी देशों के साथ शांति से रहने के पुराने नियमों के बिल्कुल खिलाफ हैं। बहरीन ने इस बात पर जोर दिया कि यूएई की स्थिरता और सुरक्षा सीधे तौर पर बहरीन और बाकी गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC देशों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है, इसलिए ऐसे समय में सभी देशों को मिलकर खड़े होने की जरूरत है।
यूएई सेना की तारीफ और संयुक्त राष्ट्र से सख्त कार्रवाई की मांग
अपने संदेश में अल सालेह ने यूएई सशस्त्र बलों और उनकी एयर डिफेंस सिस्टम की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यूएई की सेना ने अपनी पूरी क्षमता और सतर्कता दिखाते हुए समय रहते उस ड्रोन को सफलतापूर्वक हवा में ही रोक लिया। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से यह मांग की कि वह अपनी जिम्मेदारी को निभाए और ईरान को अंतरराष्ट्रीय कानूनों तथा संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करे। बहरीन ने यह भी अपील की कि ईरान को अपनी इन आक्रामक हरकतों को तुरंत रोक देना चाहिए क्योंकि इलाके में शांति बनाए रखने और लंबे समय तक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह बहुत जरूरी है। इस पूरी घटना से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी चर्चा का माहौल है कि कैसे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सभी देश मिलकर कदम उठा रहे हैं।