Saudi Arabia पर ड्रोन हमला: बहरीन समेत कई देशों ने की कड़ी निंदा, सऊदी ऊर्जा और सुरक्षा पर मंडराया खतरा.

खाड़ी देशों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब 11 सितंबर 2026 को सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर अचानक ड्रोन से हमला कर दिया गया। इस खतरनाक हमले में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा और कुछ लोग घायल भी हुए। इस घटना के तुरंत बाद 12 सितंबर 2026 को बहरीन के विदेश मंत्रालय ने सामने आकर इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया।
सऊदी विदेश मंत्रालय की जांच और इराक का एक्शन
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने अपनी शुरुआती जांच में यह साफ कर दिया कि यह ड्रोन हमला पड़ोसी देश इराक की सीमा के भीतर से लॉन्च किया गया था। इन पुख्ता सबूतों के मिलने के बाद इराकी सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और अपने एक मिलिट्री कमांडर को बर्खास्त कर दिया। इसके अलावा एहतियात के तौर पर ईरान के साथ लगने वाली शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग को भी बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए। इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने सऊदी अरब से अनुरोध किया कि वह फिलहाल किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई करने से बचें ताकि इराक खुद अपनी ज़मीन पर भविष्य के खतरों को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम कर सके। सऊदी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने स्थिति को संभालते हुए अस्थायी तौर पर पाइपलाइन को बंद कर दिया है, साथ ही देश की संप्रभुता और अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार भी सुरक्षित रखा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
इस बड़े हमले के बाद से ही पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएं जताई जाने लगी हैं। 12 सितंबर को ही इराकी विदेश मंत्री फुअद हुसैन ने सऊदी अपने समकक्ष राजकुमार फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ फोन पर लंबी बातचीत की और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा की। इस दौरान गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC, मुस्लिम वर्ल्ड लीग, ओआईसी, कतर और जॉर्डन जैसे तमाम बड़े संगठनों और देशों ने इस घटना की जोरदार निंदा की। सभी ने एक स्वर में चेतावनी दी कि इस तरह के हमले पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को एक बहुत खतरनाक टकराव की तरफ धकेल रहे हैं।
यमन के हूती विद्रोहियों की नई हरकत
एक तरफ जहां पाइपलाइन पर हमला हुआ, वहीं ठीक उसी दिन यानी 11 सितंबर को यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मयून द्वीप यानी पेरिम आइलैंड पर कब्जा कर लिया। हूती विद्रोहियों ने खुलेआम धमकी दी है कि वे इस कार्रवाई के बाद ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि सऊदी जहाजों को छोड़कर बाकी सभी के लिए समुद्री नौवहन पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और कामगारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस तरह के तनावों का असर सीधे तौर पर वहां की व्यवस्था और रोज़मर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।