पेंशन सिस्टम में बदलाव के प्रस्ताव पर बहरीन के सांसदों ने जताया कड़ा विरोध
बहरीन के सांसदों ने पेंशन सिस्टम में बदलाव के प्रस्ताव का विरोध किया है। नए नियमों के तहत न्यूनतम योगदान की सीमा तय करने की तैयारी है।

मनामा: बहरीन के सांसदों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में प्रस्तावित विधायी बदलावों का कड़ा विरोध किया है। सांसदों ने साफ किया है कि वे पेंशन सब्सक्राइबर्स के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और इन बदलावों के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
यह विवाद उस समय बढ़ा जब 26 अक्टूबर 2026 को शूरा काउंसिल के साप्ताहिक सत्र में डिक्री-लॉ नंबर 44 ऑफ 2026 पेश किया गया। किंग हमद द्वारा जारी इस डिक्री के जरिए 1976 के सामाजिक बीमा कानून में संशोधन कर अनुच्छेद 19 बीआईएस जोड़ा गया है।
नए प्रावधान के मुताबिक, सामाजिक बीमा के लिए न्यूनतम योगदान की एक सीमा तय की जाएगी। बुढ़ापे, विकलांगता और मृत्यु लाभ के लिए योगदान की गणना न्यूनतम वेतन के आधार पर होगी, जिसे भविष्य में कैबिनेट के फैसले से तय किया जाएगा। यह नियम नए पंजीकरण कराने वालों पर लागू होगा ताकि योगदान और मिलने वाले लाभ के बीच समानता बनी रहे।
लेजिसलेशन एंड लीगल ओपिनियन कमीशन ने बताया कि इस संशोधन का मकसद पेंशन फंड की लंबी अवधि की वित्तीय सेहत को सुरक्षित रखना और सिस्टम के गलत इस्तेमाल को रोकना है। एक स्पष्टीकरण ज्ञापन के अनुसार, यह कदम उन विसंगतियों को दूर करने के लिए उठाया गया है जहां न्यूनतम पेंशन लाभ के मुकाबले न्यूनतम योगदान की जरूरत नहीं थी।
इन सुधारों का उद्देश्य सोशल इंश्योरेंस ऑर्गनाइजेशन (SIO) पेंशन फंड का प्रबंधन करना है। पहले 2086 तक की सॉल्वेंसी टारगेट तय की गई थी, लेकिन उसे स्थगित करने के बाद अब फंड की समय सीमा को 2034 तक बढ़ाया गया है।
बहरीन में सामाजिक बीमा के नियमों में पिछले कुछ समय से कई बदलाव हुए हैं। 1 जनवरी 2026 से बहरीनी कर्मचारियों के लिए नियोक्ता (एम्प्लॉयर) का योगदान बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है। कानून नंबर 14 ऑफ 2022 के तहत 2028 तक नियोक्ता के कुल योगदान को 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, सरकार ने मार्च 2024 में प्रवासियों के लिए एक फंडेड एंड-ऑफ-सर्विस बेनिफिट (EOSB) योजना शुरू की थी। वहीं कानून नंबर 21 ऑफ 2020 के तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के पेंशन फंडों को एक साथ मिला दिया गया था। इन सभी बदलावों के बावजूद संसद इस मुद्दे पर टकराव का केंद्र बनी हुई है, क्योंकि सांसदों का मानना है कि ये सुधार कार्यबल पर बोझ बढ़ाएंगे।