Bahrain का बड़ा फैसला, ओमान में होने वाली ईरान से जुड़ी बैठक में शामिल होने से किया साफ इनकार

Aanya12 September 20263 min read27 viewsBahrain
Bahrain का बड़ा फैसला, ओमान में होने वाली ईरान से जुड़ी बैठक में शामिल होने से किया साफ इनकार

बहरीन देश ने क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। 12 सितंबर 2026 को बहरीन सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की कि वह ओमान की राजधानी मस्कट में होने वाली उस ministerial meeting में हिस्सा नहीं लेगी, जिसमें ईरान भी शामिल होने वाला था। यह बैठक 14 सितंबर 2026 को होनी तय थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ओमान और ईरान के बीच एक साझा शिपिंग रूट समझौते पर हस्ताक्षर करना था, जिसकी जानकारी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दी थी। बहरीन के इस फैसले से खाड़ी देशों की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है, जिसे आम लोग और प्रवासी बहुत गौर से देख रहे हैं।

कब्जे और हमलों के बीच रिश्ते सुधारना नामुमकिन

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि जब तक साल 2016 में टूटे हुए औपचारिक राजनयिक संबंध दोबारा बहाल नहीं हो जाते, तब तक बहरीन ईरान के साथ किसी भी सामूहिक बैठक में शामिल नहीं होगा। इस कड़े रुख के बारे में ओमान की सरकार को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया गया है। हालांकि, बहरीन ने ओमान की मध्यस्थता और diplomatic कोशिशों का पूरा सम्मान करने की बात कही है। मंत्रालय का यह भी कहना है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि देश बातचीत के दरवाजे बंद कर रहा है, बल्कि वह शांतिपूर्ण समाधान के हमेशा पक्ष में है।

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क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति के चार मुख्य स्तंभ

बहरीन सरकार का मानना है कि इलाके में सुरक्षा को नरमी बरतकर या आक्रामकता को नजरअंदाज करके हासिल नहीं किया जा सकता है। मंत्रालय ने हाल ही में सऊदी अरब के ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हुए हमले का जिक्र किया, जो शुक्रवार को हुआ था। इसके अलावा फरवरी 2026 से बहरीन को लगातार निशाना बना रहे ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का भी हवाला दिया गया। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए बहरीन ने शांति स्थापित करने के लिए चार जरूरी शर्तें रखी हैं। इनमें हमलों को तुरंत रोकना, नुकसान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही और मुआवजा तय करना, देश की संप्रभुता की रक्षा करना और आपसी विवादों का कानूनी तरीके से समाधान निकालना शामिल है।

होरमुज जलडमरूमध्य के लिए कड़े नियम

होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर बहरीन ने अपनी नीति बहुत स्पष्ट कर दी है। देश का कहना है कि समुद्र में नेविगेशन से जुड़े किसी भी समझौते को संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी 1982 United Nations Convention on the Law of the Sea के नियमों का पालन करना होगा और उसे इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन द्वारा अपनाया जाना चाहिए। बहरीन ने यह भी मांग की है कि ऐसे समझौतों में सभी जहाजों के लिए बिना किसी भेदभाव के और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के आने-जाने की पूरी गारंटी होनी चाहिए। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के सभी सदस्य देशों की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए। इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने यह कहा था कि इस बैठक में आठ खाड़ी-तटीय देशों के विदेश मंत्री शामिल होने वाले थे।

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