बहरीन सरकार ने विदेशी कर्मचारियों के लिए वेतन आधारित वर्क परमिट फीस के प्रस्ताव को खारिज किया अब पुरानी फीस व्यवस्था ही रहेगी जारी

मनामा: बहरीन सरकार ने संसद में पेश उस प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है जिसमें विदेशी कर्मचारियों के वर्क परमिट शुल्क को उनके वेतन से जोड़ने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव के तहत वर्क परमिट की फीस को फिक्स्ड रखने के बजाय प्रोग्रेसिव बनाने की योजना थी।
प्रस्ताव के मुताबिक उन नियोक्ताओं के लिए फीस 500 बहरीन दीनार से लेकर 2,500 बहरीन दीनार तक रखी जानी थी जो बहरीनाइजेशन कोटा के बाहर विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखते हैं। फिलहाल नियम यह है कि कोटा से बाहर भर्ती करने पर दो साल के वर्क परमिट के लिए 500 दीनार की फिक्स्ड फीस देनी होती है।
सरकार ने इस बदलाव को खारिज करने के पीछे कई व्यावहारिक चुनौतियां बताई हैं। अधिकारियों के मुताबिक आवेदन के शुरुआती चरण में औसत वेतन का सटीक सत्यापन करना मुश्किल होगा। साथ ही यह डर भी था कि नियोक्ता फीस कम कराने के लिए वेतन के आंकड़ों में हेरफेर कर सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से वर्क परमिट आवेदनों की प्रोसेसिंग में नौकरशाही देरी बढ़ सकती थी। अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय प्रतिष्ठानों में बहरीनाइजेशन नियमों को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से लागू करने के लिए मौजूदा फिक्स्ड फीस सिस्टम ही सबसे कुशल तरीका है।
इस फैसले के बाद अब पुराने शुल्क ढांचे को ही बरकरार रखा जाएगा। नियोक्ताओं को कोटा के बाहर भर्ती करने पर दो साल के परमिट के लिए 500 दीनार और एक साल के परमिट के लिए 250 दीनार का भुगतान करना होगा।
इन शुल्कों से इकट्ठा होने वाले पैसे का इस्तेमाल बहरीनी नागरिकों के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रमों में किया जाता है। बहरीनाइजेशन नीति के तहत निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए बहरीनी नागरिकों को नौकरी देने का एक तय लक्ष्य होता है। जो कंपनियां इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पातीं, उन्हें पैरेलल फीस भरकर विदेशी कर्मचारियों को रखने की अनुमति मिलती है।
यह शुल्क मानक वर्क परमिट फीस, स्वास्थ्य शुल्क और मासिक योगदान से अलग है। इन अन्य शुल्कों के लिए अलग समय सारिणी है और इनमें साल 2026 से धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू होने वाली है।