बहरीन में बिजली-पानी बिल में गड़बड़ी, निवासियों ने पारदर्शिता की मांग की

Mohd. Irfan11 October 20262 min read0 viewsBahrain
बहरीन में बिजली-पानी बिल में गड़बड़ी, निवासियों ने पारदर्शिता की मांग की

दक्षिणी बहरीन के कई निवासी इन दिनों बिजली, पानी और नगरपालिका शुल्क के बिलों से परेशान हैं। बिल में अचानक बड़ी रकम दिखने और एक जैसे घरों के बिलों में भारी अंतर से लोगों का भरोसा डगमगाने लगा है। मामला दक्षिणी नगर परिषद की बैठक तक पहुंच गया है, जहां बिल की गड़बड़ियों पर औपचारिक पूछताछ शुरू हुई है।

परिषद के पांचवें कार्यकाल की दूसरी बैठक में सदस्य हमद अल-ज़अबी ने लोगों की शिकायतें रखीं। उनके मुताबिक़ सीवरेज का शुल्क अक्सर पानी की असली खपत से मेल नहीं खाता और लोगों की उम्मीद से कहीं ज़्यादा निकलता है। उन्होंने एक घर का उदाहरण दिया, जिसका पानी का बिल लगभग 6 दीनार आया, जबकि उसके साथ जुड़ा सीवरेज शुल्क करीब 11 दीनार बना। लोगों की अपेक्षा आमतौर पर 1 दीनार और 300 से 400 फिल्स के आसपास होती है।

बिल में अचानक बड़ी रकम और असमान शुल्क

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ज़्यादा वसूली की शिकायत के बाद अधिकारियों ने दो दिनों के भीतर अतिरिक्त रकम वापस करने की बात कही है। फिर भी लोगों का सवाल यह है कि बिल की गणना आखिर किस तरीके से होती है, और यह तरीका साफ़ क्यों नहीं बताया जा रहा।

कुछ परिवारों ने बकाया रकम के अचानक उभरने की शिकायत की है। चार सदस्यों वाले एक घर का बिल 210 दीनार आया, और अगले बिल में उसी घर पर 159 दीनार का अतिरिक्त बकाया दिखा दिया गया। परिवार के लिए यह रकम समझ से बाहर थी।

सबसे ज़्यादा उलझन इस बात से है कि मिलते-जुलते घरों के बिल भी एक जैसे नहीं आ रहे। सात या आठ सदस्यों वाले घरों के बिल 20 से 30 दीनार तक आए हैं, जबकि छोटे परिवारों पर 200 से 400 दीनार तक का बोझ पड़ा है। इससे स्थानीय लोगों और प्रवासी कामगारों, दोनों में यह भ्रम है कि गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं पर टैरिफ आखिर किस आधार पर लागू हो रहा है।

ये शिकायतें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब बहरीन में बिजली और पानी के नए टैरिफ लागू हुए हैं और 2026 में 20 प्रतिशत सीवरेज शुल्क भी शुरू किया गया है। निवासी अब बिजली और पानी प्राधिकरण (EWA) और नगरपालिका संस्थाओं से मीटर की सटीकता और शुल्क ढांचे पर साफ़ जानकारी की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक बिल कैसे बनता है, यह सार्वजनिक रूप से नहीं समझाया जाता, तब तक भरोसा बहाल होना मुश्किल है।

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