बलोचिस्तान में बलोच लड़ाकों के हमले, पाक सेना और बिजली ढांचे को निशाना बनाया

Gautam Sahu3 October 20262 min read0 viewsWorld
बलोचिस्तान में बलोच लड़ाकों के हमले, पाक सेना और बिजली ढांचे को निशाना बनाया

बलोचिस्तान में हिंसा और संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में दो प्रमुख बलोच हथियारबंद संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर जोरदार हमले करने का दावा किया है। इन हमलों के बाद से इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियों की हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन घटनाओं ने एक बार फिर से क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिजली ट्रांसमिशन लाइनों को बनाया गया निशाना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलोच रिपब्लिकन गार्ड्स (बीआरजी) नामक संगठन ने सिबी के कटपार इलाके में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। संगठन के प्रवक्ता दोस्तैन बलोच ने बयान जारी कर दावा किया कि उनके लड़ाकों ने विस्फोटकों का इस्तेमाल करते हुए बिजली ट्रांसमिशन लाइन के दो मुख्य टावरों को नेस्तनाबूद कर दिया। इस धमाके की चपेट में आने से दो अन्य टावर भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।

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सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला

सिर्फ बिजली ढांचे को ही नहीं, बल्कि बलोच लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना के काफिलों को भी अपने निशाने पर लिया। बीआरजी के प्रवक्ता ने बताया कि उनके लड़ाकों ने कच्छी जिले के सन्नी क्षेत्र के पास पाकिस्तानी सेना के एक वाहन पर स्वचालित और भारी हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस दौरान कई सैनिकों के हताहत होने का दावा किया गया है, हालांकि संगठन ने सटीक आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।

दूसरी ओर, यूनाइटेड बलोच आर्मी (यूबीए) ने भी इसी क्षेत्र में एक अन्य बड़े हमले की जिम्मेदारी ली है। यूबीए के प्रवक्ता मज़ार बलोच के मुताबिक, कच्छी के सन्नी चिघार्डी इलाके में सेना के तीन वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया। यह हमला उस समय हुआ जब सेना का यह दस्ता इलाके में किसी सैन्य अभियान का हिस्सा था।

लगभग डेढ़ घंटे तक चली मुठभेड़

यूबीए के दावों के अनुसार, हमलावरों और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच करीब 90 मिनट तक भीषण गोलीबारी हुई। इस लंबी मुठभेड़ के बाद संगठन के लड़ाके सुरक्षित रूप से वहां से निकलने में सफल रहे। इस सशस्त्र संघर्ष में चार सैनिकों के मारे जाने और कई अन्य के गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया गया है।

ये दोनों ही संगठन बलोचिस्तान की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं और लगातार अपनी सैन्य गतिविधियों को जारी रखने की बात दोहराते रहे हैं। बहरहाल, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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