पाकिस्तान में बलूच छात्रों को झेलना पड़ रहा है नस्लीय भेदभाव

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान दुनिया के कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान बलूच वॉयस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनीर मेंगल ने पाकिस्तान में शिक्षा प्राप्त कर रहे बलूच छात्रों की दयनीय स्थिति का जोरदार तरीके से पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि किस तरह पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बलूच छात्रों को व्यवस्थित तरीके से नस्लीय भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उत्पीड़न
मुनीर मेंगल ने यूएनएचआरसी के मंच से बात करते हुए कहा कि पंजाब, सिंध और इस्लामाबाद के शैक्षणिक संस्थानों में बलूच युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर इन छात्रों की निगरानी की जाती है, उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और उन पर झूठे मुकदमे लादे जाते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें हॉस्टलों से जबरन बाहर निकाल दिया जाता है और कई मामलों में वे जबरन गायब कर दिए जाने की गंभीर घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
गंभीर मामले और अदालत की दखल
सत्र के दौरान मेंगल ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे बलूच छात्रों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने इस्लामाबाद हाईकोर्ट की साल 2022 की उन कार्यवाहियों का भी हवाला दिया, जिसमें अदालत ने बलूच छात्रों की कथित नस्लीय प्रोफाइलिंग की जांच के लिए एक आयोग के गठन का आदेश दिया था। इसके बावजूद ज़मीनी हालात में सुधार नहीं होने की बात कही गई है।
एशिया और मध्य पूर्व में अल्पसंख्यकों की स्थिति
अपने संबोधन को व्यापक दायरा देते हुए मेंगल ने कहा कि पाकिस्तान में बलूच छात्रों की यह समस्या एशिया और मध्य पूर्व में चल रहे बड़े पैमाने पर नस्लीय और जातीय भेदभाव का ही एक हिस्सा है। उन्होंने ईरान के विभिन्न जातीय अल्पसंख्यकों जैसे बलूच, कुर्द, अहवाजी अरब और अजरबैjani तुर्कों के साथ होने वाले भेदभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में इन समुदायों को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर असमान सजा और अत्यधिक फांसी की सजाओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, उन्होंने यमन के मुहामशून समुदाय की स्थिति पर भी रोशनी डाली।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम की मांग
मुनीर मेंगल ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से आग्रह किया कि वह डरबन घोषणा और कार्ययोजना के ठोस क्रियान्वयन को सुनिश्चित करे। उन्होंने सभी देशों से नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बलूच छात्रों, ईरान के अल्पसंख्यकों और यमन के मुहामशून समुदाय की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।