बलूचिस्तान के हालात पर बलूच वॉयस एसोसिएशन की अपील, यूएन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग

Baloch Voice Association के अध्यक्ष Munir Mengal ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद यानी UNHRC के 63वें सत्र के दौरान बलूचिस्तान के गंभीर हालातों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वहां चल रहे सैन्य अभियानों की वजह से आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि संघर्ष और सैन्य कार्रवाई के माहौल में सबसे पहले और सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाले मासूम और महिलाएं ही होते हैं।
सैन्य अभियानों से हो रहा भारी नुकसान
मुनीर मेंगल ने बताया कि बलूचिस्तान में आए दिन सैन्य अभियान चलाए जाते हैं, जिसके कारण बलूच लोगों की जान जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी ऐसी कार्रवाई होती है, तब बच्चों और महिलाओं की मौत की या उन्हें गोली लगने की खबरें सामने आती हैं। इन ऑपरेशनों के दौरान घरों को गिरा दिया जाता है और कभी-कभी तो मलबे के नीचे दबी हुई लाशें भी मिलती हैं। उन्होंने सीधे तौर पर राज्य की सेनाओं पर बलूच आबादी को खत्म करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार
मेंगल का मानना है कि पाकिस्तान खुद अपनी मर्जी से बलूचिस्तान के लोगों की जान बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाएगा। इसीलिए यह संयुक्त राष्ट्र और पूरी दुनिया के देशों की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे पाकिस्तान पर दबाव बनाएं ताकि बलूच नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न निकायों, विशेष प्रक्रियाओं और रैपोर्टर्स से अपील की है कि वे पाकिस्तान की इन कार्यवाहियों पर तुरंत ध्यान दें और उचित कदम उठाएं।
यूरोपीय संघ की भूमिका और जीएसपी प्लस का मुद्दा
बलूच नेता ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने यूरोपीय संसदों और विशेषकर यूरोपीय आयोग से कई बार इस स्थिति पर गौर करने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय आयोग के पास यह ताकत है कि वह व्यापार और मानवाधिकारों से जुड़े समझौतों के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है। उन्होंने GSP+ यानी जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेस प्लस का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान को मिलने वाले इन व्यापारिक फायदों को मुफ्त की छूट नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने यूरोपीय आयोग से आग्रह किया कि वह बलूचिस्तान के हालात पर संज्ञान ले और पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए। हालांकि, उन्होंने यूरोपीय संघ और उसके निकायों द्वारा मानवाधिकारों के मुद्दों पर पहले उठाए गए कदमों और पाकिस्तान को भेजे गए पत्रों की सराहना भी की।
राजनीतिक संघर्ष और जबरन गायब करने के मुद्दे
बलूचिस्तान की व्यापक स्थिति पर बात करते हुए मेंगल ने कहा कि हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं। उन्होंने जबरन लोगों को गायब किए जाने के मामलों का भी जिक्र किया और इस पूरे मामले को बलूच जनता और पाकिस्तानी राज्य के बीच का एक राजनीतिक संघर्ष बताया। बलूच लोग अपनी जमीन पर अपना अधिकार और संप्रभुता वापस पाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य ताकत और दमन के जरिए इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि बलूच जनता बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाने के लिए हमेशा तैयार रही है, बशर्ते इस पूरी प्रक्रिया में कोई निष्पक्ष गारंटर भी शामिल हो।